दुष्कर्म पीड़ित को गर्भ मिटाने के लिए अदालती मंजूरी जरूरी नहीं : कोर्ट

High Court
दुष्कर्म पीड़ित को गर्भ मिटाने के लिए अदालती मंजूरी जरूरी नहीं
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इंदौर : मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने वर्ष 2025 के अपने एक आदेश का हवाला देते हुए कहा है कि अगर कोई दुष्कर्म पीड़ित महिला 24 सप्ताह तक का गर्भ समाप्त करना चाहती है, तो इसके लिए उसे अदालत की मंजूरी लेने की आवश्यकता नहीं है।

इंदौर पीठ के न्यायमूर्ति संदीप एन भट्ट ने 16 साल की दुष्कर्म पीड़ित लड़की के पिता की ओर से दायर रिट याचिका गत मंगलवार को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। याचिका में नाबालिग लड़की ने अपने करीब 18 सप्ताह के गर्भ को समाप्त करने की अनुमति मांगी थी। एकल पीठ ने हाई कोर्ट के एक खंडपीठ के 20 फरवरी 2025 के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि यौन हमले, बलात्कार या अनाचार की पीड़िताें के जिन मामलों में गर्भावस्था 24 हफ्ते तक की है, उनमें गर्भ का चिकित्सकीय समापन अधिनियम 1971 के संबद्ध प्रावधानों की रोशनी में न्यायिक कार्यवाही की जरूरत नहीं है। पीठ राज्य के स्वास्थ्य विभाग के आयुक्त को खंडपीठ के पारित इस आदेश को सभी संबंधित अस्पतालों, विशेषकर शासकीय चिकित्सालयों तक पहुंचाने का निर्देश दिया ताकि वे भविष्य में भी ऐसी स्थिति का ध्यान रख सकें। पीड़ित लड़की ने अपने पिता के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर करके अनचाहे गर्भ को कानूनी रूप से समाप्त करने के लिए उचित निर्देश देने की गुहार की थी। 

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