

जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : ब्याह रचाने के बाद एक दंपत्ति 24 साल तक इंतजार करता रहा कि ऊपर वाला गोद भर देगा। इलाज भी कराया, दुआएं भी मांगी और मन्नत भी की, पर गोद खाली का खाली ही रह गई। जब आस पूरी नहीं हुई तो धरती के भगवान की शरण में आ गए। यानी हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दी। शुक्रवार को इस मामले की सुनवायी के बाद जस्टिस कृष्णा राव ने आईवीएफ (इन वेट्रे फर्टिलिटी) सिस्टम के तहत संतान पाने का प्रयास करने की अनुमति दे दी।
दंपत्ति इनवर्टी क्लिनिक में इस सिस्टम के तहत संतान पाने के लिए गए थे। उन्होंने इनकार कर दिया। इसकी वजह यह थी कि एसिस्टेड प्रोडक्टिविटी टेक्नोलॉजी एक्ट की धारा 22 जी के तहत दंपत्ति के लिए उम्र की सीमा तय कर दी गई है। इसके मुताबिक पत्नी की उम्र 51 से कम और पति की उम्र 56 से कम होनी चाहिए। यहां पत्नी की उम्र तो 49 साल है पर पति की उम्र 56 साल है। इसके बाद उन्हें हाई कोर्ट में रिट दायर करनी पड़ी। उन्होंने इस मामले में हाई कोर्ट के ही एक बेंच के फैसले का हवाला दिया था। जस्टिस राव ने भी मामले की सुनवायी के दौरान इसी फैसले का हवाला दिया। यहां गौरतलब है कि 2024 के नवंबर में इसी तरह के एक मामले में जस्टिस अमृता सिन्हा ने आईवीएफ सिस्टम के तहत संतान पाने के आवेदन को अनुमति दी थी। यहां भी पति की उम्र सीमा को पार कर गई थी। पीटिशनर के एडवोकेट की दलील थी कि जब उसने पीटिशन दायर किया था उस समय पति की उम्र 55 से थोड़ा आगे थी, पर मामले की कार्यवाही को पूरा होते-होते 56 साल हो गई। जस्टिस राव ने अपने फैसले में कहा है कि अगर दंपत्ति में सी किसी की उम्र सीमा के अंदर हो तो वे आईवीएफ सिस्टम का फायदा उठा सकते हैं।