

जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : एनजीटी के न्यायिक सदस्य अरुण कुमार त्यागी और विशेषज्ञ सदस्य ईश्वर सिंह के बेंच ने कोलकाता नगरनिगम से सवाल किया है कि आदिगंगा की सफाई का काम कब पूरा होगा। योजना के मुताबिक इसे 2024 में ही पूरा हो जाना था। चीफ इंजीनियर की तरफ से दाखिल एफिडेविट में कहा गया है कि चरणवद्ध तरीके से कार्य चल रहा है। डिविजन बेंच ने एफिडेविट दाखिल करने का आदेश दिया था।
पर्यावरणविद सुभाष दत्त ने यह पीटिशन दायर किया है। उन्होंने इसमें आरोप लगाया है कि नगरनिगम इस कार्य को बेहद मंथर गति से आगे बढ़ा रहा है। चीफ इंजीनियर की तरफ से दाखिल एफिडेविट में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि यह कार्य कब तक पूरा हो जाएगा। एनजीटी के बेंच ने आदेश दिया है कि प्रत्येक छह माह के अंतराल पर कार्य की प्रगति रिपोर्ट दाखिल करनी पड़गी। एफिडेविट में कहा गया है कि लोग आदिगंगा में कूड़ा कचरा नहीं फेंके इस लिहाज से किनारों पर रेलिंग लगायी जा रही है। आदिगंगा के तीस पुलियों पर रेलिंग लगाए जाने का कार्य पूरा हो चुका है। इसके साथ ही खिदिरपुर के दइघाटा ब्रिज से लेकर गरिया के टालायी ब्रिज तक रेलिंग लगाने का काम पूरा हो चुका है। एफिडेविट में कहा गया है कि इस वजह से कचरा फेंके जाने पर रोक लगी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आदिगंगा का किनारा 16.6 किलोमीटर लंबा है, इसलिए चरणवद्ध तरीके से रेलिंग लगाए जाने का काम किया जा रहा है। अलबत्ता इसके लिए समयसीमा का हवाला नहीं दिया गया है। इसके साथ ही कहा गया है कि ड्रेजिंग का काम चार चरणों में पूरा किया जाएगा। सुभाष दत्त ने नगरनिगम की कार्य पद्धति का हवाला देते हुए असंतोष जताया है। उन्होंने कहा है कि जब तक आदिगंगा के दोनों किनारों पर से अवैध कब्जा नहीं हटाया जाएगा तब तक संपूर्ण रूप से सफाई नहीं हो पाएगी।