तकरार माता पिता के बीच, पर दर्द उठाते हैं बच्चे

हाई कोर्ट ने बनायी उनके लिए एक गाइड लाइन
तकरार माता पिता के बीच, पर दर्द उठाते हैं बच्चे
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जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : माता-पिता के बीच तकरार की कीमत बच्चों को चुकानी पड़ती है। दर्द उन्हें उठाना पड़ता है। किसी को मां से तो किसी को पिता से बिछड़ने का गम सताता है। विजिटेशन राइट, यानी मिलने का अधिकार, के तहत बच्चों को मां या पिता से कुछ घंटों के लिए मिलने का मौका मिलता है। इस तरह उनके जीवन में आम बच्चों जैसा घरेलू माहौल नहीं रह जाता है, जहां माता-पिता दोनों का प्यार व दुलार मयस्सर हो। हाई कोर्ट ने इन बच्चों के दर्द पर मरहम लगाने के लिए एक गाइड लाइन बनायी है।

बच्चों की हिफाजत को लेकर हाई कोर्ट में बेशुमार मामले हैं। एडवोकेट अमृता पांडे ने बताया कि इसी के मद्देनजर यह गाइड लाइन बनायी गई है। यह पश्चिम बंगाल सहित पूरे अंडमान निकोबार में भी लागू होगी। इसमें इस बात पर जोर दिया गया है कि माता-पिता के अलग-अलग रहने के बावजूद बच्चों को माता और पिता दोनों के ही प्यार और दुलार से वंचित नहीं होना पड़े। तत्कालीन चीफ जस्टिस टी एस शिवंगनम और जस्टिस राजर्षि भारद्वाज के डिविजन बेंच ने इस बाबत आदेश दिया था। जजों, मनोविशेषज्ञों और जनहित से जुड़े अन्य विशेषज्ञों से सलाह मशविरा के बाद इस गाइड लाइन को अंतिम रूप दिया गया है। इसे चाइल्ड एक्सेस एंड कस्टडी गाइड लाइन्स विद पेरेंटिंग प्लान नाम दिया गया है। इसमें अंतरराष्ट्रीय मानकों पर भी अमल किया गया है। इसकी खास बात यह है कि अलगाव के बावजूद बच्चों की साझा जिम्मेदारी निभाने पर जोर दिया गया है। इसमें परिवार के अन्य सदस्यों, मसलन दादा-दादी से भी मिलने का अवसर रहेगा। इस गाइड लाइन के मुताबिक पति-पत्नी के अलगाव के एक सप्ताह के अंदर बच्चों के मिलने जुलने के बाबत फैसला लेना पड़ेगा। कोर्ट में तारीख पर तारीख नहीं पड़ेगी। अदालत, पार्क व मंदिर आदि में मुलाकात के प्रस्ताव को खारिज करते हुए कहा गया है कि मुलाकात ऐसी जगह पर करायी जाए जहां बच्चा खुद को सहज महसूस कर सके। मिलने जुड़ने से जुड़े तकरार को निपटाने के लिए फेमिली कोर्ट को स्पेशल अफसर नियुक्त करने का अधिकार दिया गया है। सबसे दिलचस्प बात तो यह है कि अगर कोर्ट को लगता है कि माता-पिता दोनों ही बच्चों की परवरिश करने के काबिल नहीं हैं तो कोर्ट बच्चों को दादा-दादी को भी सौंप सकता है। मौजूदा कानून के तहत बच्चों की हिफाजत माता या पिता दोनों में से किसी एक को ही दी जा सकती है।


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