सिक्किम में दिखा दुर्लभ मिश्मी टाकिन का झुंड, पहली बार कैमरे में कैद

उत्तर सिक्किम के टिंगदा आरक्षित वन में आठ टाकिन का वीडियो रिकॉर्ड, विशेषज्ञों ने इसे स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत बताया
सिक्किम में दिखा दुर्लभ मिश्मी टाकिन का झुंड, पहली बार कैमरे में कैद
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गंगटोक : उत्तर सिक्किम के जंगलों से वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। यहां पहली बार दुर्लभ मिश्मी टाकिन के झुंड को कैमरे में रिकॉर्ड किया गया है। वन विभाग के अधिकारियों ने नियमित गश्त के दौरान इस अनोखे जानवर का वीडियो बनाया।

यह घटना उत्तर सिक्किम के टिंगदा आरक्षित वन के बाकुचेन क्षेत्र की है, जहां अधिकारियों को आठ मिश्मी टाकिन का एक झुंड दिखाई दिया। वन एवं पर्यावरण विभाग के अनुसार, सिक्किम में अब तक दर्ज टाकिन का यह सबसे बड़ा समूह है।

20 साल बाद मिला पुख्ता सबूत

वन विभाग ने बताया कि सिक्किम में मिश्मी टाकिन के पुराने रिकॉर्ड बेहद सीमित रहे हैं। ऐसे में इस झुंड का वीडियो पिछले दो दशक से अधिक समय में इस दुर्लभ प्रजाति की मौजूदगी का सबसे महत्वपूर्ण प्रमाण माना जा रहा है।

क्या है मिश्मी टाकिन?

मिश्मी टाकिन पूर्वी हिमालय के ऊंचे पहाड़ी इलाकों में पाया जाने वाला बड़ा स्तनधारी जीव है। इसका वैज्ञानिक नाम Budorcas taxicolor है।

यह प्रजाति अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ की लाल सूची में "संवेदनशील" श्रेणी में शामिल है।

टाकिन अपने मजबूत शरीर, घने बालों और कठिन पहाड़ी परिस्थितियों में जीवित रहने की क्षमता के लिए जाना जाता है। यह करीब 4,500 मीटर तक की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रह सकता है, जहां घने जंगलों वाली घाटियां और ऊंचे घास के मैदान मौजूद होते हैं।

प्राकृतिक सुरक्षा कवच भी है खास

मिश्मी टाकिन की त्वचा से एक प्राकृतिक तैलीय पदार्थ निकलता है, जो उसे बारिश और खराब मौसम से बचाने में मदद करता है। यही विशेषता इसे हिमालयी वातावरण में जीवित रहने में सक्षम बनाती है।

विशेषज्ञों ने बताया सकारात्मक संकेत

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, मिश्मी टाकिन का स्वस्थ झुंड दिखना इस बात का संकेत है कि पूर्वी हिमालय का प्राकृतिक वातावरण अभी भी सुरक्षित है।

विशेषज्ञों ने कहा कि ऐसे दुर्लभ जीवों के संरक्षण के लिए जंगलों और उनके प्राकृतिक आवासों को आपस में जुड़े रखना बेहद जरूरी है, ताकि वन्यजीव स्वतंत्र रूप से अपना जीवन चक्र पूरा कर सकें।

सिक्किम में मिश्मी टाकिन की यह दुर्लभ झलक राज्य की जैव विविधता और हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

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