निधि, सन्मार्ग संवाददाता
बारासात : सर्पदंश की आशंका के बाद आठ साल की बच्ची को समय पर अस्पताल ले जाने के बजाय पहले ओझा और फिर झोलाछाप डॉक्टर के पास ले जाने का मामला सामने आया है। हालत बिगड़ने पर जब बच्ची को हाबरा स्टेट जनरल अस्पताल पहुंचाया गया, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। घटना हाबरा के माराकपुर इलाके की है। मृत बच्ची विश्वजीत सिंह और पूजा सिंह की बेटी थी। परिवार के अनुसार सुबह बच्ची ने खुद अपने माता-पिता को बताया कि उसे सांप ने काट लिया है। कुछ ही देर बाद उसके मुंह से झाग निकलने लगा और वह बेहोशी की हालत में जाने लगी।
पहचान संबंधी दस्तावेज को लेकर भी था संशय
इसके बाद माता-पिता उसे अस्पताल ले जाने के बजाय पहले स्थानीय ओझा के पास पहुंचे। करीब दस मिनट तक झाड़-फूंक की गई। बच्ची की हालत में सुधार नहीं होने पर ओझा ने अस्पताल ले जाने की सलाह दी। इसके बावजूद परिवार उसे एक झोलाछाप डॉक्टर के पास ले गया। परिजनों का दावा है कि वहां कुछ देर तक दवा और ऑक्सीजन देने के बाद बच्ची को वापस घर ले आया गया। बाद में उसकी तबीयत और बिगड़ने पर दोपहर में उसे हाबरा स्टेट जनरल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिवार के एक रिश्तेदार ने दावा किया कि बच्ची का आधार कार्ड या जन्म प्रमाणपत्र नहीं था। इसी वजह से बच्ची को अस्पताल ले जाने को लेकर परिवार में कथित तौर पर संशय था।