हावड़ा के सलकिया के मंदिर में स्थापित निर्माण के देवता विश्वकर्मा की प्रतिमा, जहां धूमधाम से हुई पूजा REP
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हावड़ा का विश्वकर्मा मंदिर, जहां मजदूरों की मेहनत बनती है पूजा
निर्माण के देवता की भक्ति में उमड़ी भीड़
निधि, सन्मार्ग संवाददाता
हावड़ा :
हावड़ा शहर की पहचान केवल पुराने रेलवे स्टेशन, उद्योग और स्थापत्य से ही नहीं, बल्कि उन हाथों से भी है, जिन्होंने हावड़ा को औद्योगिक शहर का स्वरूप दिया। सालकिया में गंगा किनारे सड़क के पास स्थित विश्वकर्मा मंदिर इसी मेहनतकश तबके की आस्था का केंद्र है। गोलाबाड़ी थाना क्षेत्र से कुछ दूरी पर स्थित यह मंदिर भले ही बड़े पर्यटन मानचित्र में शामिल न हो, लेकिन श्रमिकों के लिए इसका विशेष महत्व है। यहां पिछले सौ सालों की तरह ही इस बार भी निर्माण के देवता के इस मंदिर में भव्य तहत से पूजा की गयी जहां श्रद्धालूओं का तांता लगा रहा।
सौ साल पहले यहां आकर बसे श्रमिकों ने स्थापित किया था मंदिर
मंदिर के कर्ताधर्ता दिलीप शर्मा के अनुसार, सालकिया में करीब 100 वर्ष पुराना कामारपाड़ा है। यहां रेलवे की चाबी समेत विभिन्न उपकरण बनाने वाले कुछ श्रमिक आकर बसे थे। उन्होंने यहीं अपना काम शुरू किया और अपने आराध्य भगवान विश्वकर्मा की स्थापना मंदिर में की। मंदिर के पुरोहित बताते हैं कि यहां देवता के साथ गंगा का भी विशेष संबंध माना जाता है। श्रद्धालुओं के अनुसार, प्रतिदिन निर्धारित समय पर मंदिर के नीचे बने छोटे से कुंड में गंगाजल आने की मान्यता है। मंदिर में भगवान विश्वकर्मा की आकर्षक प्रतिमा विराजमान है। उनके हाथों में मापने का पैमाना, फीता और कमल जैसे प्रतीक हैं। पीछे नीले रंग का हाथी भी बनाया गया है। प्रतिदिन फल, मिठाई आदि से पूजा होती है और विश्वकर्मा पूजा के दौरान यहां बड़ी संख्या में भक्त प्रसाद ग्रहण करने पहुंचे।
श्रमिकों की प्रार्थना- हाथ सही-सलामत रहें और काम चलता रहे
स्थानीय लोगों के लिए यह मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि उनके रोजमर्रा के श्रम, रोजगार और परिवार की उम्मीदों से जुड़ा आस्था केंद्र है। मजदूरों की प्रार्थना भी सीधी है—हाथ सही-सलामत रहें और काम चलता रहे।
