एच-1बी वीजा फीस एक बार लगेगी : अमेरिका

वॉइट हाउस ने स्पष्ट किया : एक लाख डॉलर की फीस सिर्फ नये आवेदन पर लगेगी, वर्तमान एच-1बी वीजाधारकों के लिए नियमों में बदलाव नहीं
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वॉइट हाउस प्रेस सेक्रेटरी कैरोलाइन लेविट
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नयी दिल्ली : राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एच-1बी वीजा पर 1,00,000 डॉलर यानी कि 88 लाख रुपये की भारी भरकम फीस के ऐलान से मचे दुनियाभर में मचे हड़कंप के बाद अब अमेरिकी प्रशासन ने स्पष्ट किया कि है कि यह फीस सालाना नहीं बल्कि एकबारगी (वन टाइम) ली जाने वाली फीस है जो केवल नये आवेदन पर ही लागू होगी। यह बदलाव लॉटरी से निकाले गये नये वीजा पर लागू होगा। पुराने वीजा धारक, नवीनीकरण (रिन्युअल) या 21 सितंबर से पहले आवेदन करने वालों के लिए नियमों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। एच-1बी वीजा धारक अमेरिका से बाहर जा सकते हैं और वापस भी आ सकते हैं।

एच-1बी वीजा धारक अमेरिका से बाहर जा सकते हैं और वापस भी आ सकते हैं

वॉइट हाउस प्रेस सेक्रेटरी कैरोलाइन लेविट ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि जिन लोगों के पास वर्तमान में एच-1बी वीजा है या जो एच-1बी वीजा धारक हैं, उन्हें 1,00,000 डॉलर की फीस का भुगतान नहीं करना है। ये वीजा धाकर सामान्य तरह से अमेरिका में आ सकते हैं या फिर अमेरिका से जा सकते हैं। लागू किया गया नया आदेश केवल नये आवेदन और अभी चल रही लॉटरी सिस्टम पर ही लागू होगा, न कि वीजा के रिन्यूअल या फिर मौजूदा धारकों पर। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग अभी भारत जा रहे हैं या फिर वापस आने वाले हैं, उन्हें परेशान होने या फिर जल्दबाजी करने की या 1,00,000 डॉलर की फीस देने की जरूरत नहीं है। यह फीस केवल नये वीजा धारकों के लिए लागू होगी।

भारतीय दूतावास ने जारी किया हेल्पलाइन नंबर

इसी बीच ट्रंप के ऐलान के कारण मचे हड़कंप को कम करने के लिए अमेरिका स्थित भारतीय दूतावास ने आपातकालीन सहायता के लिए एक हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। +1-202-550-9931 इस नंबर पर लोग वॉट्सएप कर एच-1बी वीजा के संबंध में जानकारी ली जा सकती है। यह हेल्पलाइन नंबर सिर्फ भारतीय नागरिकों के इमरजेंसी मामलों में मदद के लिए जारी किया गया है।

अमेरिकियों के हित में निकाला आदेश : वॉइट हाउस

गौरतलब है कि ट्रम्प के शनिवार सुबह एच-1बी वीजा के लिए आवेदन फीस 88 लाख रुपये करने के बाद मेटा, माइक्रोसॉफ्ट और अमेजन जैसी टेक कंपनियों ने अपने विदेशी कर्मचारियों से रविवार तक अमेरिका लौटने को कहा था। वहीं वॉइट हाउस ने ट्रंप के एच-1बी वीजा आवेदनों पर फीस बढाने का समर्थन करने के लिए एक ‘फैक्ट शीट’ जारी की। जिसमें बताया गया कि इस कदम से अमेरिकी लोगो की नौकरियां सुरक्षित होंगी, क्योंकि विदेशी कर्मचारी कम वेतन पर अमेरिकी नौकरियों पर कब्जा कर रहे हैं।

विदेशी एसटीईएम कर्मचारियों की संख्या दोगुनी से अधिक हो गयी

वॉइट हाउस ने आंकड़े पेश करते हुए बताया कि 2003 में एच-1बी वीजा धारकों की हिस्सेदारी 32 फीसदी थी, जो हाल के वर्षों में बढ़कर 65 फीसदी से अधिक हो गयी है। वर्ष 2000 से 2019 तक विदेशी एसटीईएम (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) कर्मचारियों की संख्या दोगुनी से अधिक हो गयी जबकि कुल एसटीईएम रोजगार में केवल 44.5 फीसदी की वृद्धि हुई। वॉइट हाउस ने कुछ कंपनियों के उदाहरण भी दिये जिन्होंने एच-1बी कर्मचारियों को कम वेतन पर काम पर रखा और अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकाला।

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