निधि, सन्मार्ग संवाददाता
बैरकपुर : उत्तर 24 परगना में शहरी प्रशासन के पुनर्गठन की तैयारी तेज हो गई है। इस क्रम में बैरकपुर लोकसभा क्षेत्र के तहत आने वाली 9 नगरपालिकाओं को मिलाकर ‘ग्रेटर बैरकपुर’ नगर निगम बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। प्रस्ताव में खड़दह, टीटागढ़, बैरकपुर, उत्तर बैरकपुर, गारुलिया, भाटपाड़ा, नैहाटी, हालीशहर और कांचरापाड़ा नगरपालिकाओं को शामिल किया गया है। इन सभी नगरपालिकाओं में कुल 221 वार्ड हैं और 2011 की जनगणना के अनुसार यहां करीब 15 लाख की आबादी है। यहां बता दें कि बैरकपुर की इन सभी नगरपालिकाओं की जिम्मेदारी फिलहाल एसडीओ से लेकर डब्ल्यूबीसीएस अधिकारी तक संभाल रहे हैं। नियम के अनुसार बोर्ड भंग होने के छह महीने के भीतर चुनाव कराया जाना जरूरी है। प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो कलकत्ता व हावड़ा नगर निगम के साथ ही नवान्न के शीर्ष अधिकारियों के निर्देश पर नौ नगरपालिकाओं को मिलाकर एक नगर निगम बनाने की योजना है। इस क्रम में ही बैरकपुर के एसडीओ यादव सूर्यभान अच्छेलाल ने सभी पालिकाओं से विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। रिपोर्ट मिलने के बाद समेकित रिपोर्ट तैयार कर ‘ग्रेटर बैरकपुर’ नगर निगम बनाने का प्रस्ताव महकमा प्रशासन की ओर से सरकार को भेज दिया गया है। प्रस्तावित निगम में शामिल नौ नगरपालिकाओं में कुल 221 वार्ड हैं। इन्हें मिलाकर एक नगर निगम बनाया जा सकता है। इसके बाद परिसीमन और वार्ड पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू होगी।
पानीहाटी से दक्षिण दमदम तक ‘दमदम कॉरपोरेशन’ का भी है प्रस्ताव
‘ग्रेटर बैरकपुर’ के साथ ही पानीहाटी से दक्षिण दमदम तक सात नगरपालिकाओं को मिलाकर ‘दमदम कॉरपोरेशन’ बनाने का प्रस्ताव भी तैयार किया गया है। इस प्रस्ताव को लेकर भी प्रशासनिक स्तर पर रिपोर्ट तैयार कर उचित माध्यम से भेजी जा चुकी है। अब यह प्रस्ताव भी राज्य सरकार के फैसले पर निर्भर है। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार दमदम कॉरपोरेशन’ बनने पर संबंधित नगरपालिकाओं को एकीकृत कर नया शहरी निकाय तैयार किया जाएगा। इससे क्षेत्र के विकास कार्यों के लिए अधिक राशि मिलने और नागरिक सुविधाओं के विस्तार की उम्मीद है। फिलहाल नवान्न के शीर्ष अधिकारियों के अंतिम निर्णय का इंतजार है। दोनों प्रस्तावों पर सरकार की मंजूरी के बाद ही आगे की प्रक्रिया स्पष्ट होगी।
निगम बनने पर बढ़ेगा विकास का बजट
प्रस्ताव के अनुसार बैरकपुर में निगम का मुख्य कार्यालय बनाए जाने की योजना है। तीन से चार मौजूदा वार्डों को मिलाकर एक नया वार्ड गठित किए जाने की संभावना है। निगम बनने से राज्य सरकार से विकास कार्यों के लिए अधिक राशि मिलने और बड़े पैमाने पर आधारभूत ढांचे का विकास होने की उम्मीद जताई जा रही है। प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि एकीकृत निकाय बनने से क्षेत्र में विकास योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू किया जा सकेगा। हालांकि, अंतिम फैसला अब राज्य सरकार को लेना है।