महिलाओं की पीड़ा को लेकर सरकारी बहरी है : राहुल गांधी

कहा : यह ‘बहरी’ सरकार सिर्फ दबाव में ही सुनेगी।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी महिलाओं -युवतियों के बीच
कांग्रेस नेता राहुल गांधी महिलाओं -युवतियों के बीच
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‘जेन जी’ की महिलाओं से बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरने का आह्वान

नई दिल्ली : कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने महिलाओं के खिलाफ अपराध और उनकी सुरक्षा के मुद्दे को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने देश के युवाओं, खासकर ‘जेन जी’ (Gen Z) की महिलाओं से बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरकर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की।

राहुल गांधी ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह देश में महिलाओं के सम्मान, स्वतंत्रता और सुरक्षित सार्वजनिक जीवन से जुड़ा सवाल है। उन्होंने युवाओं से इस मुद्दे पर आवाज उठाने का आग्रह किया।

सरकार दबाव में ही सुनेगी : राहुल

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर जारी अपने संदेश में सरकार पर महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर संवेदनशीलता की कमी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हजारों छात्र और युवा महिलाओं की सुरक्षा की मांग को लेकर सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं।

उन्होंने दावा किया कि सरकार लोगों की आवाज तब तक नहीं सुनेगी, जब तक उस पर सार्वजनिक दबाव नहीं बनाया जाता। राहुल गांधी ने अपने संदेश में सरकार को ‘बहरी’ बताते हुए कहा कि दबाव पड़ने पर ही वह लोगों की बात सुनेगी।

शांतिपूर्ण प्रदर्शन को बताया लोकतांत्रिक अधिकार

राहुल गांधी ने युवाओं के विरोध प्रदर्शन को लोकतांत्रिक अधिकार से जोड़ते हुए कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को सामने रखना नागरिकों का अधिकार है। उन्होंने प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं के प्रति समर्थन जताया।

उनका कहना था कि महिलाओं की सुरक्षा के सवाल पर युवाओं को अपनी आवाज उठानी चाहिए और सरकार से जवाबदेही की मांग करनी चाहिए।

लेडी श्रीराम कॉलेज की छात्रा से कथित दुष्कर्म का उल्लेख

राहुल गांधी ने अपने संदेश के साथ एक वीडियो भी जारी किया। इसमें उन्होंने लेडी श्रीराम कॉलेज की एक छात्रा के साथ कथित दुष्कर्म समेत कुछ अन्य घटनाओं का उल्लेख किया।

इन घटनाओं का हवाला देते हुए उन्होंने महिलाओं के सामने मौजूद सुरक्षा संबंधी चिंताओं को रेखांकित किया। उनके संदेश का केंद्र यह था कि महिलाओं को सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षित वातावरण मिलना चाहिए और अपराधों के मामलों में प्रभावी कार्रवाई होनी चाहिए।

‘महिलाओं को अपराध के लिए दंडित नहीं किया जाए'

राहुल गांधी ने कहा कि महिलाओं को अपराधों के लिए जिम्मेदार ठहराना या उनकी स्वतंत्रता पर पाबंदी लगाना समाधान नहीं है। उन्होंने महिलाओं के बीच सार्वजनिक स्थानों पर चलने, उत्पीड़न और दुष्कर्म को लेकर मौजूद भय का मुद्दा उठाया।

उनके अनुसार, महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के बजाय उन्हें घर में रहने की सलाह देना समस्या का समाधान नहीं है। उन्होंने इस तरह की सोच पर सवाल उठाते हुए कहा कि महिलाओं को स्वतंत्र रूप से सार्वजनिक जीवन में भाग लेने का अधिकार होना चाहिए।

‘महिलाओं को घर में रहने की सलाह देना पितृसत्ता’

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि महिलाओं की सुरक्षा के सवाल पर सरकार की ओर से ऐसा जवाब दिया जाता है कि महिलाओं को घर में रहना चाहिए। राहुल गांधी ने इस सोच को ‘पितृसत्ता’ से जोड़ते हुए इसकी आलोचना की।

उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था में अपराध का सामना करने वाली महिला को ही सवालों के घेरे में खड़ा किया जाता है, जबकि अपराध करने वाले व्यक्ति पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं होती। राहुल गांधी ने पीड़िता को दोष देने की प्रवृत्ति को समाप्त करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

अपराधी को संरक्षण देने की मानसिकता खत्म हो

राहुल गांधी ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों के मामलों में पीड़िता को दोषी ठहराने और अपराधी को संरक्षण मिलने की मानसिकता को बदलने की जरूरत है।

उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा को व्यापक सामाजिक बदलाव से जोड़ते हुए कहा कि केवल कानून बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। समाज में महिलाओं के प्रति व्यवहार, सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा और अपराधों पर कार्रवाई—इन सभी पहलुओं पर काम करने की आवश्यकता है।

समाधान महिलाओं को घरों में बंद करना नहीं

राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि महिलाओं की सुरक्षा का रास्ता उन्हें घरों तक सीमित करना नहीं है। उनके मुताबिक, इसके बजाय सार्वजनिक स्थानों और सड़कों को महिलाओं के लिए सुरक्षित बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपने दैनिक जीवन, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक गतिविधियों के लिए बिना डर के बाहर निकलने का अधिकार होना चाहिए।

दुर्व्यवहार करने वाली मानसिकता का सामना करने की जरूरत

राहुल गांधी ने महिलाओं के खिलाफ अपराध को केवल व्यक्तिगत घटनाओं के रूप में देखने के बजाय उसके पीछे मौजूद सामाजिक मानसिकता पर सवाल उठाया।

उन्होंने कहा कि महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार करने वाले पुरुषों की मानसिकता का सामना करना जरूरी है। उनके अनुसार, महिलाओं की सुरक्षा के लिए समाज में लैंगिक समानता और सम्मान की संस्कृति को मजबूत करना भी आवश्यक है।

अपराधियों को तेजी से सजा देने की मांग

राहुल गांधी ने महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मामलों में तेज और प्रभावी न्याय की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि महिलाओं पर हमला करने वाले लोगों के खिलाफ तेजी से कार्रवाई और सजा होनी चाहिए।

उनके मुताबिक, कानून का प्रभाव तभी दिखाई देगा जब अपराधों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावी ढंग से आगे बढ़े तथा दोष सिद्ध होने पर कानून के अनुसार सजा सुनिश्चित हो।

युवाओं को आंदोलन से जोड़ने की कोशिश

राहुल गांधी की अपील में युवाओं और विशेष रूप से ‘जेन जी’ महिलाओं को केंद्र में रखा गया। उन्होंने देश की युवा महिलाओं से बड़ी संख्या में प्रदर्शन में शामिल होने का आग्रह किया।

यह अपील ऐसे समय में सामने आई है जब महिलाओं की सुरक्षा और उनके खिलाफ अपराध का मुद्दा सार्वजनिक बहस का विषय बना हुआ है। राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर युवाओं की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया।

महिलाओं की सुरक्षा पर राजनीतिक बहस तेज

राहुल गांधी के बयान के बाद महिलाओं की सुरक्षा, कानून-व्यवस्था, न्याय की गति और सरकार की जवाबदेही जैसे मुद्दे राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गए हैं।

कांग्रेस नेता ने जहां सरकार पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर पर्याप्त कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया, वहीं इस मुद्दे पर सरकार और संबंधित प्रशासन की ओर से किए गए दावों और कार्रवाई को अलग-अलग स्रोतों से देखना जरूरी है।


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