बिना अनुमति सरकारी कर्मचारियों को बयान देने की मनाही

सरकारी सूचनाओं की सुरक्षा के लिए नया आदेश जारी
बिना अनुमति सरकारी कर्मचारियों को बयान देने की मनाही
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प्रसेनजीत, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और अनुशासन को मजबूत करने के उद्देश्य से सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के मीडिया व सार्वजनिक मंचों पर बयान देने को लेकर दिशानिर्देश जारी किए हैं। इस कदम को राज्य प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक सुव्यवस्थित बनाने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है।

मुख्य सचिव कार्यालय की ओर से जारी निर्देश के अनुसार अब आईएएस, डब्ल्यूबीसीएस, डब्ल्यूबीपीएस समेत सभी सरकारी अधिकारियों को किसी भी मीडिया कार्यक्रम, सार्वजनिक मंच या सोशल मीडिया पर टिप्पणी करने से पहले आवश्यक अनुमति लेनी होगी। इसका उद्देश्य सरकारी सूचनाओं के अधिकृत और सटीक संप्रेषण को सुनिश्चित करना बताया गया है। सरकारी दस्तावेजों और नीतिगत जानकारी को अनधिकृत साझा करने पर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, ताकि प्रशासनिक गोपनीयता और नीतिगत स्थिरता बनी रहे।

साथ ही, यह व्यवस्था सभी सरकारी बोर्ड, निगम, नगरपालिकाओं और सरकारी सहायता प्राप्त संस्थानों पर भी लागू होगी। प्रशासन का मानना है कि इस कदम से विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा और संवेदनशील जानकारी का दुरुपयोग रोका जा सकेगा। अधिकारियों के अनुसार, यह पहल प्रशासनिक कार्यों में जवाबदेही बढ़ाने और सरकार की नीतियों को सही संदर्भ में जनता तक पहुंचाने में मदद करेगी।

नई व्यवस्था के तहत कर्मचारियों को मीडिया से संवाद के लिए एक स्पष्ट प्रक्रिया का पालन करना होगा, जिससे सरकारी कामकाज में एकरूपता और विश्वसनीयता बनी रहे। हालांकि गुरुवार को नई अधिसूचना जारी करते हुए नवान्न ने स्पष्ट किया कि इसके दायरे में सरकारी बोर्ड, निगम, सरकारी अधीनस्थ और अन्य पैरास्टेटल संगठनों के कर्मचारी भी शामिल होंगे। ऐसे में शिक्षा क्षेत्र को इस नियम से कुछ छूट मिलने की संभावना जताई जा रही है।

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