

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने 2013 के बलात्कार मामले में पत्रकार तरुण तेजपाल को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाने वाले बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ उनकी अपील पर शुक्रवार को गोवा पुलिस को नोटिस जारी किया।
न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले के पीठ ने मामले में सजा बढ़ाने की मांग करने वाली गोवा सरकार की याचिका पर तेजपाल को भी नोटिस जारी किया।
तेजपाल ने सजा पर रोक और जमानत की मांग की
सुनवाई के दौरान तेजपाल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत से उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि यह ऐसा मामला है जिसमें अधीनस्थ अदालत के बरी करने के फैसले को हाई कोर्ट ने पलट दिया है और इसलिए उनके मुवक्किल को अपील का अधिकार है। सिब्बल ने अदालत को बताया कि तेजपाल आत्मसमर्पण कर चुके हैं और हाई कोर्ट ने पहले सजा पर चार सप्ताह के लिए रोक लगाई थी। पीठ ने कहा कि मामले की सुनवाई के लिए एक निश्चित तारीख तय की जाएगी।
25 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने आत्मसमर्पण का दिया था निर्देश
इससे पहले 25 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने तेजपाल को 10 साल की सजा काटने के लिए तीन सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था। अदालत ने उस समय आत्मसमर्पण से छूट देने का अनुरोध खारिज कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक, उन्हें 21 सितंबर तक आत्मसमर्पण प्रमाणपत्र दाखिल करने के लिए समय दिया गया था। इसके बाद तेजपाल ने अधीनस्थ अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण किया। अब उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले और सजा को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
गोवा सरकार ने सजा बढ़ाने की मांग की
मामले में केवल तेजपाल की अपील ही सुप्रीम कोर्ट के सामने नहीं है। गोवा सरकार ने भी अलग याचिका दायर कर 10 साल की सजा बढ़ाने की मांग की है। इसी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तेजपाल को नोटिस जारी किया है। इस तरह सुप्रीम कोर्ट के सामने एक ओर तेजपाल की दोषसिद्धि और सजा को चुनौती देने वाली याचिका है, जबकि दूसरी ओर राज्य सरकार सजा बढ़ाने की मांग कर रही है।
किस मामले में हुई थी दोषसिद्धि
यह मामला नवंबर 2013 में सामने आया था। तेजपाल पर गोवा के एक कार्यक्रम के दौरान एक महिला सहकर्मी के साथ यौन अपराध करने का आरोप लगा था। मामले की सुनवाई के दौरान निचली अदालत ने उन्हें बरी कर दिया था। बाद में बॉम्बे हाई कोर्ट ने उस फैसले को पलटते हुए उन्हें दोषी ठहराया और 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसी फैसले के खिलाफ तेजपाल ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।
किन धाराओं के तहत हुई दोषसिद्धि
तेजपाल को भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया है। इनमें धारा 376(2)(एफ), धारा 354(ए) और धारा 354(बी) शामिल हैं। धारा 376(2)(एफ) ऐसे व्यक्ति द्वारा बलात्कार से संबंधित थी जो विश्वास या अधिकार की स्थिति में हो। इस प्रावधान के तहत अधिकतम सजा आजीवन कारावास तक हो सकती है।
हाई कोर्ट के फैसले को पलटने का मुद्दा अहम
तेजपाल की ओर से सुप्रीम कोर्ट में मुख्य जोर इस बात पर है कि निचली अदालत के बरी करने के फैसले को हाई कोर्ट ने पलटकर दोषसिद्धि की है। कपिल सिब्बल ने इसी आधार पर अपील के अधिकार और सजा पर राहत की मांग को अदालत के सामने रखा। अब सुप्रीम कोर्ट दोनों पक्षों की दलीलों और रिकॉर्ड पर विचार करेगा। शुक्रवार की सुनवाई में अदालत ने नोटिस जारी किया है और मामले की आगे की सुनवाई के लिए तारीख तय करने की बात कही है।
सुप्रीम कोर्ट के सामने अब दो याचिकाएं
इस मामले की मौजूदा स्थिति को दो प्रमुख याचिकाओं के रूप में समझा जा सकता है-
तरुण तेजपाल की अपील : बॉम्बे हाई कोर्ट की दोषसिद्धि और 10 साल की सजा को चुनौती।
गोवा सरकार की याचिका : तेजपाल को दी गई 10 साल की सजा बढ़ाने की मांग।
दोनों पक्षों को नोटिस जारी होने के बाद मामले की अगली सुनवाई में अदालत संबंधित पक्षों के जवाब पर विचार करेगा। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने मामले के अंतिम परिणाम पर कोई निर्णय नहीं दिया है।
आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट अब गोवा पुलिस और अन्य संबंधित पक्षों के जवाब मिलने के बाद अपीलों पर आगे सुनवाई करेगा। तेजपाल की ओर से उनकी सजा पर रोक और जमानत की मांग भी रखी गई है। दूसरी ओर, गोवा सरकार सजा बढ़ाने की मांग कर रही है। मामले में आगे की सुनवाई की तारीख तय होने के बाद सुप्रीम कोर्ट इन दलीलों पर विस्तार से विचार करेगा।