नयी दिल्ली : जर्मनी ने भारत के रूस और यूक्रेन दोनों के साथ बहुत अच्छे संबंधों का हवाला देते हुए फिर कहा है कि यूरोपीयन यूनियन (ईयू) चाहती है कि रूस-यूक्रेन के बीच युद्ध विराम के लिए भारत मध्यस्थ की भूमिका निभा कर पूर्वी यूरोप में शांति बहाली की राह आसान करे। भारत आर्थिक उतार चढ़ाव और राजनीतिक अस्थिरता को दुनिया के सामने दो बड़ी चुनौतियां बताते हुए इस बात पर जोर दिया कि भारत और ईयू को इससे निपटने के लिए मिलकर काम करना होगा। भारत ने इस बात पर भी जोर दिया कि ईयू के साथ एफटीए के लिए उसकी बातचीत जल्द ही किसी निर्णायक नतीजे पर पहुंचे।
जर्मनी के लिए भारत बहुत महत्वपूर्ण : वेडफुल
भारत दौरे पर आये जर्मनी के विदेशमंत्री जोहान वेडफुल ने मेजबान विदेशमंत्री एस जयशंकर के साथ बुधवार को साझा प्रेस कांफ्रेंस में उक्त अपील करते हुए कहा कि भारत रूस के साथ अपने संबंधों को शांति बहाली के लिए प्रयोग करे। क्योंकि यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की शांति वार्ता तो चाहते हैं लेकिन व्लादिमीर पुतिन के साथ शांति वार्ता टेबल पर आना नहीं चाहते।
'टैरिफ बम' पर चुप रहे वेडफुल
वेडफुल ने हांलांकि भारत पर अमेरिका द्वारा थोपे गये 50 फीसदी टैरिफ के मामले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी लेकिन कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र और तेजी से आगे बढ़ रही अर्थ व्यवस्था है। इसलिए जर्मनी के लिए भारत बहुत महत्वपूर्ण है। जर्मनी यूरोपियन यूनियन के साथ भारत के मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को पूरा समर्थन देगा। जर्मनी स्वयं भी भारत के साथ आर्थिक संबंध मजबूत करना चाहता है इसलिए एक बड़ा बिजनेस प्रतिनिधिमंडल उनके साथ भारत आया है।
एफटीए के लिए जर्मनी की भूमिका अहम : जयशंकर
जयशंकर ने भारत की ईयू के साथ एफटीए के लिए उसकी बातचीत जल्द ही किसी निर्णायक नतीजे पर पहुंचने पर जोर देते हुए कहा कि जर्मनी ईयू का सबसे बड़ा देश है उसकी भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। जयशंकर ने बताया कि वेडफुल के इस दौरे में द्विपक्षीय संबंधों पर फोकस रहा। भारत जर्मनी के बहुपक्षीय संबंधों की समीक्षा की गयी। रणनीतिक, राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, हरित उर्जा, अंतरिक्ष, विज्ञान और तकनीक और सांस्कृतिक सहयोग विषयों पर एक दूसरे का सहयोग करने पर आपसी सहमति बनी।
50 बिलियन यूरो डॉलर के व्यापार को दोगुना करेंगे
दोनों देशों के बीच अभी 50 बिलियन यूरो डॉलर का व्यापार होता है इसे दो गुना किया जायेगा। आपसी व्यापार को सुगम बनाने के लिए दोनों देश अपने अपने व्यापार नियम आसान करेंगे। सेमीकंडक्टर में भारत की प्रतिभा और जर्मनी की तकनीक मिल कर काम करेंगे। विज्ञान और अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में भी दोनों देशों में समझौते किये गये। जयशंकर ने वेडफुल से बातचीत में यह उम्मीद भी जतायी कि जर्मनी में प्रवासी भारतीयों के सांस्कृतिक अधिकारों की रक्षा की जायेगी।