

सबिता राय, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : सब तीरथ बार-बार, गंगा सागर एक बार...सागरद्वीप पर हर साल मकर संक्रांति के पावन अवसर पर देश दुनिया से लाखों श्रद्धालु पुण्य स्नान करने पहुंचते हैं। अन्य तीर्थ आप बार-बार जा सकते है लेकिन मान्यता यह है कि गंगासागर में एक बार पुण्य स्नान से मोक्ष की प्राप्ति होती है। वहीं दूसरी ओर जलमार्ग होकर जाना पड़ता है जो कि एक कठिन राह है लेकिन जहां मोक्ष पाने की आस्था हो तो लोग इस कठिन मार्ग को भी पार करने में पीछे नहीं रहते हैं। इस मार्ग को सहज बनाने के लिए यहां अब गंगासागर ब्रिज तैयार होने जा रहा है। 5 जनवरी को राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी नये ब्रिज का शिलान्यास करेंगी। इस गंगासागर ब्रिज को पूरा करने के लिए 3 सालों का लक्ष्य रखा गया है और यह जब तैयार हो जायेगा तो निश्चित रूप से देश - दुनियां में बंगाल की एक अलग छवि देखी जायेगी क्योंकि हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु बंगाल के बाहर से यहां पुण्य स्नान के लिए आते हैं। बंगाल की तस्वीर बदलेगी ही साथ ही बेहतर सड़क संपर्क मार्ग से लेकर तीर्थ और पर्यटन स्थलों को नई पहचान भी मिलेगी। अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। गंगासागर ब्रिज बनने के बाद धार्मिक यात्रा सहज और सुरक्षित हो जाएगी। श्रद्धालु बिना लंबे इंतजार और कठिनाइयों के सीधे सड़क मार्ग से गंगासागर जा पाएंगे, जिससे यह तीर्थ यात्रा और भी आनंददायक साबित होगी।
पर्यटन को इस तरह से मिलेगा बढ़ावा
बेहतर सड़क संपर्क से तीर्थ और पर्यटन स्थलों पर अधिक लोग आयेंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। केवल मकर संक्रांति पर ही नहीं बल्कि पूरे वर्ष यहां श्रद्धालुओं का आना लगा रहता है। इस ब्रिज के तैयार होने से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। मुड़ी गंगा पर यह गंगासागर ब्रिज करीब 5 किलोमीटर लंबा और 4 लेन का होगा।
ब्रिज के लिए चल रहा है यह कार्य
पीडब्ल्यूडी विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक ब्रिज के शिलान्यास को लेकर कई तरह की तैयारियां चल रही हैं। वहीं ब्रिज का निर्माण कार्य शुरू होने से पहले प्रारंभिक आंतरिक कार्य किये जाते और फिलहाल गंगासागर ब्रिज को लेकर यह कार्य किया जा रहा है। जैसा कि पहले ही बताया गया है कि यह ब्रिज निवेदिता सेतु की तरह दिखेगा। इस तरह ब्रिज से कई फायदे हैं। पानी के बीच में पाइलिंग कम करना पड़ता है। तेज पानी के बहाव से भी असर कम पड़ता है।