

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ कर दिया है कि पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती करना सरकार के लिए आसान नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसा करने पर करीब 1 लाख करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान होगा, जो अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर डाल सकता है।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में ईंधन की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। पिछले 10 दिनों में चौथी बार पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए गए हैं। सोमवार को पेट्रोल 2.61 रुपये और डीजल 2.71 रुपये प्रति लीटर महंगा हो गया, जिससे आम लोगों के खर्च और परिवहन लागत पर दबाव बढ़ा है।
एसआईडीबीआई की 37वीं वर्षगांठ के मौके पर बोलते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि मौजूदा हालात में लोगों के बीच डर या नकारात्मक माहौल फैलाना ठीक नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश को विश्वास और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है।
सीतारमण ने वैश्विक हालात का जिक्र करते हुए ‘तीन F’—फ्यूल, फर्टिलाइजर और फॉरेक्स—पर ध्यान देने की बात कही। उन्होंने बताया कि मिडिल ईस्ट संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में दबाव बना हुआ है, जिससे उर्वरक और सोने की कीमतों में भी भारी उछाल देखा जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग हालात को जरूरत से ज्यादा नकारात्मक दिखा रहे हैं, जबकि भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत स्थिति में है। उनके मुताबिक, मौजूदा चुनौतियां ज्यादातर बाहरी कारणों से पैदा हुई हैं और देश इनसे निपटने में सक्षम है।