गाजा से बंगाल तक: पंडाल में दिखेगी मानवीय त्रासदी की झलक

बेहला फ्रेंड्स क्लब इस साल दर्शकों को करायेगा ऐतिहासिक यात्रा
गाजा की त्रासदी का आईना बनेगा दुर्गा पूजा का यह पंडाल
गाजा की त्रासदी का आईना बनेगा दुर्गा पूजा का यह पंडाल
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सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा न केवल एक धार्मिक पर्व है, बल्कि एक सांस्कृतिक उत्सव भी है। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी कोलकाता के विभिन्न क्षेत्रों में भव्य पंडालों की तैयारी जोरों पर है। दक्षिण कोलकाता के कलाकार एक से बढ़कर एक अनोखे थीमों पर आधारित पंडालों का निर्माण कर रहे हैं, जो दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं। पंडालों की भव्यता और कलाकारी को देखने के लिए देशभर से श्रद्धालु और पर्यटक कोलकाता पहुंचते हैं।

युद्ध और मानवीय त्रासदी की झलक
युद्ध और मानवीय त्रासदी की झलक

गाजा जैसे युद्धग्रस्त क्षेत्रों की पीड़ा को दर्शाएगा बेहला फ्रेंड्स क्लब

बेहला फ्रेंड्स क्लब इस वर्ष दुर्गा पूजा में युद्ध और मानवीय त्रासदी को केंद्र में रखकर एक संवेदनशील थीम प्रस्तुत कर रहा है। इस साल का थीम 'नवान्न : वन्डर्स, वार एंड हंगर' है। थीम का उद्देश्य है हिंसा से उपजे दर्द, विस्थापन और भूख की सच्चाई को रचनात्मक रूप से सामने लाना। इस बार पंडाल गाजा जैसे युद्धग्रस्त क्षेत्रों की पीड़ा को दर्शाएगा, जहां रोटी के लिए भटकती मां की व्यथा 1943 के बंगाल के अकाल की याद दिलाती है। इस थीम के आर्टिस्ट प्रदीप दास हैं।

युद्धग्रस्त क्षेत्रों की पीड़ा
युद्धग्रस्त क्षेत्रों की पीड़ा

50 लाख रुपये की लागत से तैयार हो रहा है पंडाल

क्लब के मेंबर संजीव मुखर्जी ने बताया कि इस साल पूजा समिति अपना 60वां वर्ष मना रही है। पूरे पंडाल का बजट 50 लाख रुपये है। इसके साथ ही थीम के अनुसार लाइटिंग की जा रही है। मां दुर्गा की प्रतिमा इस बार 12 फीट ऊंची बनाई गई है, जिसे पारंपरिक रूप में सजाया गया है।

मानवीय त्रासदी की फोटो
मानवीय त्रासदी की फोटोMunmun

पंडाल तक कैसे पहुंचें?

अगर आप बेहला फ्रेंड्स क्लब का पंडाल देखना चाहते हैं, तो सबसे पहले आपको बेहला इलाके में स्थित 14 नंबर बस स्टॉप तक पहुंचना होगा। यह स्थान लोकल ट्रांसपोर्ट से आसानी से जुड़ा हुआ है।


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