तृणमूल का प्रतीक फ़्रीज होना ‘ऊपरवाले का न्याय’ : शमिक भट्टाचार्य

तृणमूल का चुनाव चिह्न रहे या न रहे, लोगों को कोई फर्क नहीं पड़ता
तृणमूल का प्रतीक फ़्रीज होना ‘ऊपरवाले का न्याय’ : शमिक भट्टाचार्य
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सबिता, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : तृणमूल का प्रतीक रहे या नहीं इससे लोगों को कोई मतलब नहीं है। तृणमूल मृत, तृणमूल निर्मूल हो गई गई। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने इस भाषा में तृणमूल पर निशाना साधा। राष्ट्रीय चुनाव आयोग द्वारा ‘जोड़ा फूल’ चुनाव चिह्न को फ्रीज करने के फैसले के बाद भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद शमिक भट्टाचार्य ने ममता बनर्जी और उनकी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर तीखे शब्दों में हमला बोला है। चुनाव में ‘जोड़ा फूल’ चिह्न के इस्तेमाल को लेकर कालीघाट और ऋतब्रत बनर्जी के गुट के बीच जारी विवाद के बीच आयोग के इस ऐतिहासिक कदम को उन्होंने ‘ऊपरवाले का न्याय’ करार दिया। उन्होंने स्पष्ट रूप से दावा किया कि राज्य की राजनीति में अब तृणमूल कांग्रेस का कोई अस्तित्व नहीं रह गया है। पत्रकारों से बातचीत के दौरान शमिक भट्टाचार्य ने अपने पुराने अनुभवों का जिक्र किया। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा, “यह पूरी तरह ऊपरवाले का न्याय है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक समय उत्तर 24 परगना और बैरकपुर औद्योगिक क्षेत्र में तृणमूल के लोगों ने फरमान जारी किया था कि अगर सिंदूर या आलता के पैकेट पर कमल के फूल की तस्वीर होगी, तो उसे बेचा नहीं जा सकता। आज हालात कहां आकर खड़े हो गए हैं। तृणमूल का चुनाव चिह्न रहे या न रहे, इससे अब बंगाल के आम लोगों को कोई फर्क नहीं पड़ता।”

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