फ्रांस 15 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए करेगा सोशल मीडिया बैन, क्या भारत भी ऐसा करेगा?

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत और फ्रांस मिलकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए एक ढांचा तैयार करने पर काम करेंगे जिसमें नवाचार को जिम्मेदारी के साथ और प्रौद्योगिकी को मानवता के साथ जोड़ा जाएगा।
एआई इम्पैक्ट समिट’ में पीएम नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों।
एआई इम्पैक्ट समिट’ में पीएम नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों।
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नई दिल्लीः फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत और फ्रांस मिलकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए एक ढांचा तैयार करने पर काम करेंगे जिसमें नवाचार को जिम्मेदारी के साथ और प्रौद्योगिकी को मानवता के साथ जोड़ा जाएगा। मैक्रों ने कहा कि बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों के बीच सभी डिजिटल उपकरणों को समावेशी दृष्टिकोण की तरफ निर्देशित करने की आवश्यकता बढ़ती जा रही है। मैक्रों ने यह जानकारी साझा की कि फ्रांस में 15 वर्ष से कम आयु के बच्चों को सोशल मीडिया से दूर करने के लिए योजना बनाई जा रही है।

यहां ‘एआई इम्पैक्ट समिट’ में अपने संबोधन में मैक्रों ने कहा कि फ्रांस और भारत ‘संप्रभु एआई’ विकसित करने के लिए एक साझा दृष्टिकोण रखते हैं, जिसका उद्देश्य पृथ्वी की रक्षा करना और सभी के लिए समृद्धि को बढ़ावा देना है।

उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे समय में जब तनाव बढ़ रहा है, हमारे सभी डिजिटल उपकरणों को इस समावेशी दृष्टिकोण की तरफ निर्देशित करने की आवश्यकता और भी बढ़ गई है। वास्तव में, ऐसा करने से न केवल भारत में बल्कि अफ्रीकी महाद्वीप में भी मजबूती आएगी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘आइए मिलकर विभाजन के बजाय सेतु बनाने, विनाश के बजाय सृजन करने और लेने के बजाय साझा करने पर ध्यान केंद्रित करें। फ्रांस जी7 की अपनी अध्यक्षता का उपयोग इस दृष्टिकोण को बढ़ावा देने के लिए करेगा।’’

मैक्रों ने कहा कि जी7 के वर्तमान अध्यक्ष के रूप में फ्रांस बच्चों को एआई और डिजिटल दुर्व्यवहार की चपेट में आने से बचाने के लिए काम करेगा। उन्होंने कहा, ‘‘इसीलिए फ्रांस में हम 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल नेटवर्क पर प्रतिबंध लगाने की प्रक्रिया शुरू कर रहे हैं। हम आज यहां मौजूद कुछ यूरोपीय देशों के साथ इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं जिनमें ग्रीस और स्पेन शामिल हैं।’’

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘मुझे पता है, प्रधानमंत्री जी, आप भी इस क्लब में शामिल होंगे। यह बहुत अच्छी खबर है कि भारत बच्चों और किशोरों की सुरक्षा के लिए इस तरह का कदम उठाएगा। हम अपने युवा नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने को तैयार हैं।’’

मैक्रों ने भारत को बताया एआई में प्रमुख खिलाड़ी

भारत को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में एक प्रमुख खिलाड़ी बताते हुए फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने एआई के उपयोग को नियंत्रित करने वाले नियमों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, ‘‘मैं यह बताने आया हूं कि हम इस क्षेत्र के लिए नियम तैयार करने को लेकर दृढ़ संकल्पित हैं। और ऐसा हम भारत जैसे अपने सहयोगियों के साथ मिलकर करेंगे, क्योंकि हम मूलभूत साझा मूल्यों, विज्ञान, कानून के शासन और वैश्विक संतुलन में विश्वास करते हैं।’’

मैक्रों ने कहा कि अब अपनी ताकत को उन चीजों में लगाने का समय आ गया है जो कारगर हैं। उन्होंने कहा कि ठोस कार्रवाई और समाधान की जरूरत है जो एआई को अधिक टिकाऊ, कुशल और सुलभ बनाएं। मैक्रों ने एआई क्षेत्र में ‘प्रतिभा और रचनात्मकता का लाभ उठाने के लिए लक्षित वित्तपोषण’ का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा, ‘‘एआई का भविष्य उन लोगों द्वारा गढ़ा जाएगा जो नवाचार और जिम्मेदारी को जोड़ते हैं। प्रौद्योगिकी के साथ मानवता को शामिल करते हैं। भारत और फ्रांस मिलकर इस भविष्य को आकार देने में मदद करेंगे। और यह यात्रा अभी शुरू ही हुई है।’’

मैक्रों ने किया यूपीआई की प्रशंसा

फ्रांस के राष्ट्रपति ने अपने संबोधन की शुरुआत भारत की डिजिटल क्षेत्र में प्रगति की सराहना करते हुए की। उन्होंने कहा, ‘‘दस साल पहले मुंबई में रेहड़ी-पटरी दुकानदार बैंक खाता नहीं खोल सकता था। न पता, न कागजात, न ही सुलभता। और आज वही दुकानदार अपने फोन पर तुरंत भुगतान स्वीकार करता है। देश में किसी से भी तुरंत, मुफ्त में।’’

उन्होंने कहा, ‘‘यह सिर्फ एक तकनीकी कहानी नहीं है, यह एक सभ्यता की कहानी है। और भारत ने कुछ ऐसा बनाया है जो दुनिया के किसी भी देश ने नहीं बनाया है । 1.4 अरब लोगों के लिए एक डिजिटल पहचान। एक भुगतान प्रणाली जो अब हर महीने 20 अरब लेनदेन संसाधित करती है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘एक स्वास्थ्य अवसंरचना जिसने पांच करोड़ डिजिटल स्वास्थ्य पहचान पत्र जारी किये हैं। ये रहे परिणाम। इसे ‘इंडिया स्टैक ओपन इंटरऑपरेबल सॉवरेन’ कहा जाता है।” ‘इंडिया स्टैक ओपन इंटरऑपरेबल सॉवरेन’ से आशय भारत के खुले और आपस में जुड़े हुए डिजिटल ढांचे से है जो देश के अपने नियंत्रण में हो।

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