

गांवों- शहरों में आवारा मवेशियों की समस्या से निपटने को सरकार ने तेज किए प्रयास
चंडीगढ़ : हरियाणा में गांवों और शहरों की सड़कों पर घूम रहे आवारा मवेशियों की समस्या से निपटने के लिए राज्य सरकार ने कई स्तरों पर अभियान शुरू किया है। सरकार की योजना राज्य में चार बड़े ‘गौ वन’ विकसित करने के साथ-साथ मौजूदा गौशालाओं की क्षमता बढ़ाने और नई गौशालाएं शुरू करने की है।
राज्य लोक उद्यम ब्यूरो के अध्यक्ष मोहन लाल कौशिक ने यह जानकारी हरियाणा गौ सेवा आयोग के पदाधिकारियों के साथ हुई बैठक के दौरान दी। बैठक में आवारा मवेशियों को सुरक्षित आश्रय देने, गौशालाओं की क्षमता बढ़ाने, चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने और घायल व बीमार गायों के लिए परिवहन सुविधा विकसित करने सहित कई मुद्दों पर चर्चा की गई।
बैठक में मोहन लाल कौशिक ने बताया कि वर्तमान में राज्यभर में करीब 70,000 गाय सड़कों पर घूम रही हैं। इन मवेशियों को सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराने के लिए गौशालाओं और प्रस्तावित ‘गौ वन’ में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया चलाई जा रही है।
उन्होंने कहा कि इस अभियान में हरियाणा गौ सेवा आयोग, ग्राम पंचायतों और शहरी स्थानीय निकायों के सहयोग से काम किया जा रहा है। उद्देश्य यह है कि सड़कों पर खुले में घूम रहे मवेशियों को व्यवस्थित तरीके से आश्रय दिया जाए और उनके लिए चारे तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की जा सके।
आवारा मवेशियों के सड़कों पर रहने से यातायात, दुर्घटनाओं और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े सवाल भी पैदा होते हैं। ऐसे में सरकार की ओर से गौशालाओं के विस्तार और नए आश्रय स्थल विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।
राज्य सरकार ने आवारा मवेशियों को बड़े स्तर पर आश्रय देने के लिए चार स्थानों पर ‘गौ वन’ विकसित करने की योजना बनाई है।
इनमें शामिल हैं:
महेंद्रगढ़ के भोजावास गांव
पलवल का राजपुरा खादर
कैथल का भूना
करनाल का सांभली
इन परियोजनाओं के जरिए बड़ी संख्या में मवेशियों के लिए खुले और सुरक्षित आश्रय की व्यवस्था करने का लक्ष्य रखा गया है।
महेंद्रगढ़ जिले के भोजावास गांव में प्रस्तावित ‘गौ वन’ परियोजना सबसे आगे बताई जा रही है। यहां करीब 89 एकड़ भूमि में गौ वन विकसित किया जा रहा है।
अधिकारियों के मुताबिक, इस परियोजना का काम अंतिम चरण में पहुंच चुका है। इसके पूरा होने के बाद यहां आवारा मवेशियों को आश्रय देने के साथ-साथ उनके लिए चारा और दूसरी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी।
सरकार के लिए भोजावास परियोजना एक महत्वपूर्ण मॉडल के रूप में सामने आ सकती है, क्योंकि बड़े भू-भाग में मवेशियों के लिए व्यवस्थित आश्रय विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।
भोजावास के अलावा राज्य के तीन अन्य स्थानों पर भी ‘गौ वन’ विकसित करने की प्रक्रिया जारी है।
पलवल के राजपुरा खादर, कैथल के भूना और करनाल के सांभली में इसके लिए काम आगे बढ़ाया जा रहा है।
इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद सरकार को सड़कों पर मौजूद मवेशियों को चरणबद्ध तरीके से इन आश्रय स्थलों में स्थानांतरित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
राज्य सरकार ने ग्राम पंचायतों की भूमिका को भी इस योजना में महत्वपूर्ण बनाया है। कौशिक ने बताया कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने ग्राम पंचायतों को गौशालाओं के लिए कम से कम 10 एकड़ ‘गोचर’ भूमि उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
इसका उद्देश्य गौशालाओं में रखी जाने वाली गायों के लिए पर्याप्त चारे की व्यवस्था सुनिश्चित करना है।
गोचर भूमि उपलब्ध होने से गौशालाओं को चारे की जरूरत के लिए बाहरी स्रोतों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही, मवेशियों के लिए उपलब्ध स्थान बढ़ाने में भी सहायता मिलेगी।
सरकार के अनुसार, हरियाणा में फिलहाल करीब 707 पंजीकृत गौशालाएं हैं। इन गौशालाओं में लगभग 40,000 गायों को रखा गया है।
सरकार के सामने चुनौती यह है कि सड़कों पर मौजूद बाकी मवेशियों के लिए भी पर्याप्त क्षमता विकसित की जाए। इसी उद्देश्य से मौजूदा गौशालाओं का विस्तार करने और नई गौशालाएं शुरू करने पर जोर दिया जा रहा है।
70 हजार आवारा गायों और मौजूदा गौशालाओं में करीब 40 हजार गायों के आंकड़ों के बीच क्षमता का अंतर सरकार के सामने एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती को दर्शाता है।
सरकार ने गौशालाओं की संख्या और क्षमता बढ़ाने की दिशा में समयबद्ध कदम उठाने की बात कही है।
कौशिक के अनुसार, इस महीने 22 गौशालाओं को चालू किया जाएगा। इससे बड़ी संख्या में मवेशियों को आश्रय देने के लिए अतिरिक्त जगह उपलब्ध होने की उम्मीद है।
इसके अलावा 14 नई गौशालाएं खोलने की प्रक्रिया भी जारी है। नई गौशालाओं के शुरू होने से राज्य में उपलब्ध आश्रय क्षमता और बढ़ेगी।
राज्य सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती सड़कों पर मौजूद करीब 70 हजार गायों को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराना है।
वर्तमान आंकड़ों के मुताबिक लगभग 40 हजार गाय पहले से पंजीकृत गौशालाओं में रखी गई हैं। ऐसे में बाकी मवेशियों के लिए अतिरिक्त क्षमता तैयार करना आवश्यक होगा।
सरकार की योजना में:
मौजूदा गौशालाओं की क्षमता बढ़ाना
नई गौशालाएं शुरू करना
चार बड़े ‘गौ वन’ विकसित करना
ग्राम पंचायतों से गोचर भूमि उपलब्ध कराना
चारे की व्यवस्था मजबूत करना
घायल और बीमार गायों के लिए परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना
जैसे कदम शामिल हैं।
सरकार ने गौशालाओं में केवल आश्रय व्यवस्था बढ़ाने के साथ-साथ घायल और बीमार मवेशियों तक सहायता पहुंचाने के लिए भी नई सुविधा शुरू करने की घोषणा की है।
कौशिक ने बताया कि जल्द ही राज्यभर की पंजीकृत गौशालाओं को ई-रिक्शा उपलब्ध कराए जाएंगे। इन ई-रिक्शा का इस्तेमाल ‘गौ सेवा रथ’ के रूप में किया जाएगा।
इनका मुख्य उद्देश्य घायल और बीमार गायों को सहायता पहुंचाना और जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित स्थान तक ले जाना होगा।
‘गौ सेवा रथ’ योजना के तहत ई-रिक्शा उपलब्ध कराने का उद्देश्य गौशालाओं को स्थानीय स्तर पर तत्काल प्रतिक्रिया देने की सुविधा देना है।
सड़क पर घायल मवेशी मिलने की स्थिति में उन्हें उठाकर गौशाला या उपचार केंद्र तक पहुंचाने के लिए परिवहन की जरूरत होती है। ई-रिक्शा उपलब्ध होने से गौशालाओं को ऐसी परिस्थितियों में स्वतंत्र रूप से कार्रवाई करने में मदद मिल सकती है।
यह व्यवस्था विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों और व्यस्त सड़कों के आसपास घायल मवेशियों को हटाने में उपयोगी हो सकती है।
गौशालाओं में बड़ी संख्या में मवेशियों को रखने के लिए सबसे महत्वपूर्ण जरूरतों में चारा शामिल है। सरकार की ओर से पंजीकृत गौशालाओं को चारा अनुदान के रूप में आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है। इसके लिए सरकार ने आवेदन प्रक्रिया शुरू की है।
सरकार के अनुसार चारा अनुदान के लिए संबंधित पोर्टल खुला हुआ है। पंजीकृत गौशालाएं 14 अक्टूबर तक आवेदन कर सकती हैं। इस वित्तीय सहायता का उद्देश्य गौशालाओं को मवेशियों के लिए पर्याप्त चारा उपलब्ध कराने में मदद करना है।
सरकार की व्यापक योजना में चारे की उपलब्धता को गौशाला विस्तार के साथ जोड़ा गया है, क्योंकि केवल आश्रय स्थल तैयार करना पर्याप्त नहीं होगा। वहां रखे गए मवेशियों के लिए नियमित भोजन और देखभाल की व्यवस्था भी जरूरी होगी।
आवारा मवेशियों की समस्या केवल ग्रामीण क्षेत्रों तक सीमित नहीं है। शहरों में भी सड़कों और बाजारों में मवेशियों के घूमने की समस्या सामने आती रही है।
इसी कारण सरकार ने इस अभियान में ग्राम पंचायतों और शहरी स्थानीय निकायों दोनों को शामिल किया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायतों के माध्यम से गोचर भूमि और गौशालाओं से जुड़ी सुविधाएं विकसित करने पर जोर है, जबकि शहरी क्षेत्रों में आवारा मवेशियों को सड़कों से हटाकर सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की व्यवस्था पर ध्यान दिया जा रहा है।
कौशिक के मुताबिक सरकार का उद्देश्य केवल नई गौशालाएं बनाना नहीं है। इसके साथ मवेशियों के लिए सुरक्षित आश्रय, चारा, उपचार और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना भी प्राथमिकता में है।
इसके लिए ‘गौ वन’ और गौशालाओं को एक व्यापक व्यवस्था के रूप में विकसित करने की योजना बनाई जा रही है।
इस व्यवस्था में आवारा मवेशियों को सड़क से हटाकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना, उनकी देखभाल करना और बीमार या घायल मवेशियों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना शामिल है।
‘गौ वन’ को बड़े भू-भाग में मवेशियों के लिए विकसित किए जाने वाले आश्रय क्षेत्र के रूप में देखा जा रहा है। सामान्य गौशालाओं की तुलना में बड़े क्षेत्र में अधिक संख्या में मवेशियों को रखने के लिए ऐसी व्यवस्था विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।
हरियाणा में चार स्थानों पर प्रस्तावित गौ वन इसी उद्देश्य से विकसित किए जा रहे हैं। भोजावास में 89 एकड़ में चल रहा काम इस परियोजना का प्रमुख उदाहरण है।
इन क्षेत्रों में मवेशियों के लिए आश्रय के साथ चारे और देखभाल से संबंधित सुविधाएं विकसित करने की योजना है।
सड़कों पर आवारा मवेशियों की मौजूदगी केवल पशु कल्याण का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह यातायात और सड़क सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है।
राजमार्गों, मुख्य सड़कों और शहरों की व्यस्त सड़कों पर मवेशियों के अचानक आ जाने से वाहन चालकों के लिए जोखिम पैदा हो सकता है। रात के समय यह समस्या और गंभीर हो सकती है। ऐसे में सरकार की ओर से मवेशियों को व्यवस्थित आश्रय देने की योजना का एक उद्देश्य सड़कों पर उनकी मौजूदगी कम करना भी है।
राज्य में 707 पंजीकृत गौशालाओं में करीब 40 हजार गायों के होने के बीच नई गौशालाओं का संचालन शुरू करना सरकार की योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
22 गौशालाओं को इसी महीने चालू करने और 14 नई गौशालाओं की प्रक्रिया जारी रहने से आने वाले समय में आश्रय क्षमता बढ़ने की उम्मीद है।
हालांकि, वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि नई सुविधाओं में कितने मवेशियों को रखा जा सकता है और उन्हें लंबे समय तक चारा, पानी, चिकित्सा तथा अन्य जरूरी सुविधाएं किस स्तर पर उपलब्ध कराई जाती हैं।
सरकार की मौजूदा योजना को मोटे तौर पर चार स्तरों पर समझा जा सकता है:
पहला, बड़े क्षेत्र में चार ‘गौ वन’ विकसित करना।
दूसरा, मौजूदा गौशालाओं की क्षमता बढ़ाना और नई गौशालाएं शुरू करना।
तीसरा, ग्राम पंचायतों के माध्यम से कम से कम 10 एकड़ गोचर भूमि उपलब्ध कराकर चारे की व्यवस्था मजबूत करना।
चौथा, घायल और बीमार मवेशियों के लिए ‘गौ सेवा रथ’ और चारा अनुदान जैसी सहायता उपलब्ध कराना।
इन सभी उपायों का उद्देश्य सड़कों पर मौजूद मवेशियों को सुरक्षित आश्रय देना और उनकी देखभाल की व्यवस्था को मजबूत करना है।
हरियाणा में करीब 70 हजार गायों के सड़कों पर होने के आंकड़े के बीच सबसे बड़ी चुनौती इन सभी मवेशियों को चरणबद्ध तरीके से सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की होगी।
इसके लिए पर्याप्त आश्रय क्षमता के साथ-साथ नियमित चारा, पानी, चिकित्सा देखभाल, कर्मचारियों और वित्तीय संसाधनों की जरूरत होगी।
चार ‘गौ वन’, नई गौशालाओं और मौजूदा गौशालाओं के विस्तार के जरिए सरकार इस क्षमता को बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
सरकार की योजना में तीन प्रमुख जरूरतों—आश्रय, भोजन और उपचार—को एक साथ संबोधित करने का प्रयास दिखाई देता है।
जहां गौ वन और नई गौशालाएं आश्रय की जरूरत पूरी करने के लिए हैं, वहीं गोचर भूमि और चारा अनुदान भोजन की व्यवस्था से जुड़े हैं। दूसरी ओर, ‘गौ सेवा रथ’ घायल और बीमार मवेशियों तक सहायता पहुंचाने के लिए प्रस्तावित किए गए हैं।
हरियाणा में आवारा मवेशियों की समस्या से निपटने के लिए सरकार द्वारा घोषित प्रमुख कदम इस प्रकार हैं:
चार स्थानों पर ‘गौ वन’ विकसित किए जा रहे हैं।
महेंद्रगढ़ के भोजावास में 89 एकड़ में गौ वन का काम अंतिम चरण में है।
पलवल, कैथल और करनाल में तीन अन्य गौ वन विकसित किए जा रहे हैं।
ग्राम पंचायतों को गौशालाओं के लिए कम से कम 10 एकड़ गोचर भूमि उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।