50 वर्षों से ईश्वर चंद्र विद्यासागर को 'वामपंथी तरीके' से पेश किया जाता रहा है : जगन्नाथ

विद्यासागर को राष्ट्रवाद से जोड़ने पर उठे गंभीर सवाल
50 वर्षों से ईश्वर चंद्र विद्यासागर को 'वामपंथी तरीके' से पेश किया जाता रहा है : जगन्नाथ
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मुनमुन, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : पश्चिम बंगाल के उच्च शिक्षा मंत्री जगन्नाथ चटर्जी ने दावा किया है कि पिछले 50 वर्षों से ईश्वर चंद्र विद्यासागर को 'वामपंथी तरीके' से पेश किया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि सत्ता बदलते ही इस ट्रेंड को तोड़ा जाएगा और विद्यासागर के जीवन व योगदान को 'राष्ट्रवाद की रोशनी' में स्थापित किया जाएगा। मंत्री के इस बयान के बाद राज्य में एक नई वैचारिक बहस शुरू हो गई है। उच्च शिक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि पिछले पांच दशकों में विद्यासागर के बारे में जो विश्लेषण हुए हैं, वे वामपंथी रुझान वाले रहे हैं और सरकार अब इस ट्रेंड को पूरी तरह बदलेगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विद्यासागर के बाल विवाह रोकने के प्रयासों और महिला शिक्षा के क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान को नई दृष्टि से देखा जाना चाहिए। मंत्री ने राज्य के कॉलेजों में छात्राओं की बढ़ती संख्या को सकारात्मक बताते हुए विद्यासागर के आदर्शों को राष्ट्रवाद के सांचे में ढालने की बात कही, जिससे शैक्षणिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।

विद्यासागर के विचारों पर बढ़ी बहस

शिक्षाविद् पवित्र सरकार और प्रोफेसर शक्तिसाधन मुखर्जी ने मंत्री के इस दावे का कड़ा विरोध किया है। उनका कहना है कि ईश्वर चंद्र विद्यासागर एक पक्के नास्तिक, सेक्युलर और मानवतावादी विचारक थे, जिन्होंने अपने समय में वेदांत दर्शन को भी खारिज कर दिया था। जानकारों का मानना है कि विद्यासागर की धर्मनिरपेक्ष और आधुनिक सोच को आज के राष्ट्रवाद के सांचे में ढालना और उनके विचारों को इस दायरे में मिलाना बिल्कुल संभव नहीं है, क्योंकि दोनों की विचारधाराओं में जमीन-आसमान का अंतर है।


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