निधि, सन्मार्ग संवाददाता
नदिया : कल्याणी विधानसभा क्षेत्र की सगुना ग्राम पंचायत में मतदाता सूची में धोखाधड़ी का एक अत्यंत गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है। यहाँ एक ही परिवार के पाँच सदस्यों पर बांग्लादेशी नागरिकता छिपाकर अवैध रूप से भारतीय मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने का आरोप लगा है। इस मामले ने न केवल स्थानीय प्रशासन में हड़कंप मचा दिया है, बल्कि SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया को लेकर चल रहे राजनीतिक घमासान को भी बढ़ा दिया है।
शिकायत और जांच का विवरण
यह पूरा मामला चुनाव आयोग में एक लिखित शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद उजागर हुआ, जिसके उपरांत कल्याणी के सब-डिविजनल ऑफिसर (SDO) कार्यालय ने जाँच शुरू कर दी है। शिकायत में सगुना निवासी मधु सरकार और उनकी दो बेटियाँ—लाकी सरकार और लता सरकार—शामिल हैं। आरोप है कि ये तीनों बांग्लादेश में पैदा हुए थे, फिर भी इनके नाम भारतीय वोटर लिस्ट में मौजूद हैं।
मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बांग्लादेश के मुंशीगंज में जन्मी लाकी सरकार ने 'लाकी राय' नाम से वोटर लिस्ट में नाम दर्ज कराया है, जिसमें उनके पिता का नाम 'मधुसूदन सरकार' लिखा गया है। शिकायतकर्ताओं ने दावा किया है कि मधु सरकार और मधुसूदन सरकार दो अलग-अलग व्यक्ति हैं, जिससे पिता के नाम में बड़ी विसंगति सामने आई है। इतना ही नहीं, लाकी के बेटे आकाश राय का जन्म भी बांग्लादेश में हुआ था, इसके बावजूद उसे किसी नगरपालिका से भारतीय जन्म प्रमाण पत्र मिला है। छोटी बेटी लता सरकार की शादी भले ही भारत में हुई हो, लेकिन वह भी बांग्लादेश की जन्मजात निवासी हैं।
प्रशासन और नेताओं की प्रतिक्रिया
कल्याणी के SDO ने इस मामले की गंभीरता को स्वीकार करते हुए स्पष्ट किया है कि यदि जाँच में कोई भी नाम अयोग्य पाया जाता है, तो उसे SIR प्रक्रिया के माध्यम से मतदाता सूची से तत्काल हटा दिया जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि आयोग के दिशानिर्देशों के अनुसार उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, कल्याणी के भाजपा विधायक अंबिका राय ने इस घटना की तीखी निंदा की और आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया के कारण ही ऐसी धोखाधड़ी सामने आ रही है। उन्होंने सीधे राज्य की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर ऐसे अवैध कार्यों के पीछे होने का आरोप लगाते हुए कहा कि इसी वजह से टीएमसी नेता SIR का विरोध कर रहे हैं। दूसरी ओर, इलाके में पहुँचे परिवहन मंत्री स्नेहाशीष चक्रवर्ती ने पलटवार करते हुए मतदाता सूची में इस तरह की गड़बड़ियों के लिए सीधे चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराया, और आरोप लगाया कि आयोग ने अपने दायित्वों का सही ढंग से पालन नहीं किया, जिसका खामियाजा अब आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।