CAA आवेदन के बाद भी नागरिकता का डर: SIR जांच के खौफ में बुनकर ने की आत्महत्या !

Fear of losing citizenship even after applying under CAA: Weaver commits suicide fearing SIR investigation!
सांकेतिक फोटो
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निधि, सन्मार्ग संवाददाता

नदिया : नदिया जिले के शांतिपुर से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहाँ नागरिकता खोने के डर और मतदाता सूची के सत्यापन (SIR) की प्रक्रिया के तनाव ने एक बुनकर की जान ले ली। इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है और राज्य में एक बार फिर राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है।

क्या है पूरी घटना?

नदिया जिले के शांतिपुर शहर के वार्ड नंबर 2, ढाकापाड़ा के रहने वाले सुबोध देबनाथ पेशे से एक बुनकर थे। शनिवार सुबह वह हमेशा की तरह वार्ड नंबर 4 के कामरपाड़ा स्थित एक कारखाने में काम करने गए थे। जब उनके साथी कर्मचारी पावरलूम चलाने के लिए दूसरे कमरों में थे, तब सुबोध ने कारखाने के एक अंधेरे कोने में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। कुछ देर बाद जब साथियों की नजर उन पर पड़ी, तो कोहराम मच गया।

SIR और नागरिकता का मानसिक दबाव

मृतक के परिवार और सहकर्मियों का दावा है कि सुबोध पिछले काफी समय से मानसिक तनाव और हताशा में थे। उन्होंने भारतीय नागरिकता सुनिश्चित करने के लिए CAA (नागरिकता संशोधन अधिनियम) के तहत आवेदन भी किया था। इसके बावजूद, उनके मन में यह डर बैठा हुआ था कि क्या वह और उनका परिवार इस देश में रह पाएंगे?

हाल ही में, बीएलओ (BLO) ने सुबोध और उनकी पत्नी को SIR (Special Inquiry Report) सुनवाई के लिए नोटिस दिया था। उनकी सुनवाई आगामी 19 जनवरी को होनी थी। परिवार का कहना है कि सुबोध इस सुनवाई को लेकर बेहद घबराए हुए थे। उन्हें डर था कि अगर मतदाता सूची से नाम कट गया तो पुलिस उन्हें पकड़ लेगी और उन्हें देश छोड़ना पड़ेगा। इसी डर और अवसाद के कारण उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठाया।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप

इस घटना ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को फिर से गरमा दिया है:

  • तृणमूल कांग्रेस (TMC): स्थानीय विधायक ब्रजकिशोर गोस्वामी ने भाजपा सरकार और निर्वाचन आयोग पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा जानबूझकर सामान्य लोगों को आतंक के साये में जीने पर मजबूर कर रही है। सुबोध ने CAA के लिए आवेदन किया था, फिर भी उन्हें अपनी नागरिकता पर भरोसा नहीं हो पा रहा था, जो केंद्र की नीतियों की विफलता को दर्शाता है।

  • भारतीय जनता पार्टी (BJP): भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि राज्य में अब हर मृत्यु को 'SIR आतंक' का नाम देना एक चलन बन गया है। पार्टी का कहना है कि मौत के पीछे अन्य कारण भी हो सकते हैं जिन्हें राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।

शांतिपुर थाना पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए राणाघाट पुलिस मुर्दाघर भेज दिया है। पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है कि क्या आत्महत्या की वजह केवल प्रशासनिक नोटिस था या इसके पीछे कुछ और पारिवारिक या व्यक्तिगत कारण थे।

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