'डिजिटल अरेस्ट' के खौफ ने ली जान !

सिम के जरिए अपराध का फर्जी नोटिस देख युवक ने की आत्महत्या
Fear of 'digital arrest' claims a life!
सांकेतिक फोटो REP
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निधि, सन्मार्ग संवाददाता

बारासात : पश्चिम बंगाल के अशोकनगर थाना अंतर्गत बेड़ाबेड़ी पंचायत के राजबेरिया गांव में एक युवक की मौत ने पूरे इलाके में तनाव और शोक का माहौल पैदा कर दिया है। 37 वर्षीय मनीरुल गोलदार का शव घर के पास एक आम के पेड़ से लटका हुआ मिला। परिवार का आरोप है कि मनीरुल 'डिजिटल अरेस्ट' के फर्जी जाल और पुलिस कार्रवाई के डर से बुरी तरह टूट चुका था, जिसके कारण उसने आत्मघाती कदम उठाया।

क्या है पूरा मामला?

पेशे से मधु व्यवसायी (शहद का व्यापार करने वाले) मनीरुल के घर बीते 8 जनवरी को डाक के जरिए एक नोटिस आया था। यह नोटिस कथित तौर पर महाराष्ट्र की पुणे सिटी साइबर पुलिस के नाम से भेजा गया था। नोटिस में दावा किया गया था कि मनीरुल के नाम पर जारी एक सिम कार्ड का इस्तेमाल किसी गंभीर आपराधिक गतिविधि में किया गया है। उसे निर्देश दिया गया था कि वह सात दिनों के भीतर पुलिस से संपर्क करे, अन्यथा उस पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।

बिना फोन कॉल के बिछाया गया मौत का जाल

आमतौर पर 'डिजिटल अरेस्ट' के मामलों में वीडियो कॉल या मैसेज का सहारा लिया जाता है, लेकिन इस मामले में अपराधी ने पोस्ट ऑफिस के माध्यम से फर्जी सरकारी लेटरहेड वाले नोटिस का इस्तेमाल किया। मनीरुल के पड़ोसी मोक्कादेश मंडल ने बताया कि नोटिस मिलने के बाद से ही मनीरुल गहरे सदमे में था। वह बार-बार कह रहा था कि उसने कभी कोई गलत काम नहीं किया, फिर पुलिस उसे क्यों फंसा रही है। उसने स्थानीय स्तर पर पुलिस को भी इसकी जानकारी दी थी, लेकिन उसका डर खत्म नहीं हुआ।

झूठ बोलकर घर से निकला और फिर...

परिजनों के अनुसार, बुधवार रात मनीरुल ने परिवार से कहा कि वह शहद इकट्ठा करने के काम से बाहर जा रहा है। उसने अपना बैग पैक किया और घर से निकल गया। गुरुवार सुबह ग्रामीणों ने घर से कुछ दूर सूर्या खेल के मैदान के पास एक चाय की दुकान के पीछे आम के पेड़ से उसका शव लटका देखा।

पुलिस जांच और जनप्रतिनिधियों की प्रतिक्रिया

घटना की सूचना मिलते ही अशोकनगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। हाबड़ा-2 पंचायत समिति के तृणमूल कर्माध्यक्ष गोपी मजूमदार ने कहा, "मनीरुल शुरू से ही एक ही मोबाइल नंबर इस्तेमाल करता था। फर्जी नोटिस मिलने के बाद से वह पूरी तरह आतंकित था। पुलिस को लिखित शिकायत दी गई है ताकि यह पता चल सके कि वह फर्जी नोटिस किसने भेजा था।"

साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि यह 'डिजिटल अरेस्ट' का एक नया और घातक रूप है, जहां लोगों को कागजी कार्रवाई के नाम पर डराकर जान देने या पैसे ऐंठने पर मजबूर किया जा रहा है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

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