New Delhi
पराली प्रबंधन में किसान अपना रहे इनोवेटिव तरीके

पराली प्रबंधन में हरियाणा के किसान अपना रहे इनोवेटिव तरीके, पंजाब अभी पीछे

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने दिल्ली-एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (ग्रैप) का पहला चरण लागू किया
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नयी दिल्ली : दिल्ली के प्रदूषण के लिए हरियाणा, पंजाब और यूपी में धान की पराली जलाने को जिम्मेदार ठहराया जाता है। दिल्ली की आबोहवा प्रदूषित है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने 21 अक्टूबर को दिल्ली-एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (ग्रैप) का पहला चरण लागू किया। केंद्रीय वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने दिल्ली एनसीआर की आबोहवा शुद्ध रखने के लिए सभी सीमावर्ती राज्यों के साथ निरंतर बैठके कीं और अनेक उपाय सुझाए। हरियाणा के किसानों ने पराली प्रबंधन के लिए 3 तरीके अपनाए। 39 प्रतिशत किसान पराली का इस्तेमाल चारे के रूप में करते हैं, 38 प्रतिशत उसकी गांठें बनाते हैं, जबकि 32 प्रतिशत किसान सुपर सीडर जैसी मशीनों की मदद से फसल अवशेषों को मिट्टी में मिलाते हैं। ज्यादातर किसान पराली जलाने के बजाय वैकल्पिक उपाय अपनाने के इच्छुक हैं। हालांकि, पराली की गांठें बनाने (बेलिंग) वाले किसानों में से केवल 7 प्रतिशत को ही खरीदारों से भुगतान मिल पाता है।

पैसा मिल नहीं रहा, किसानों की जेब से खर्च

काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू) ने जनवरी से मार्च 2026 के बीच हरियाणा के 12 जिलों के 144 गांवों में 1,588 किसानों का सर्वेक्षण किया। केवल 6 प्रतिशत किसानों ने पराली जलाने की बात स्वीकार की, जबकि 26 प्रतिशत ने अपने गांव में पराली जलाए जाने की जानकारी दी। हरियाणा में करीब 80 प्रतिशत किसानों को पराली नहीं जलाने पर 1,200 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि दी जाती है। लेकिन केवल 42 प्रतिशत किसानों ने योजना के तहत आवेदन किया। इनमें से 57 प्रतिशत आवेदकों को ही भुगतान मिला। बेलिंग कराने वाले 31 प्रतिशत किसानों को अपने खेतों से पराली हटवाने के लिए उलटे पैसे खर्च करने पड़े। इसलिए पराली प्रबंधन के लिए समय पर भुगतान और आर्थिक प्रोत्साहन की व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत है।

पंजाब में जलाई जा रही पराली

हरियाणा जहां बेहतर पराली प्रबंधन कर रहा है, वहीं पंजाब अभी पीछे है। पंजाब के 5 गांवों में सैटेलाइट तस्वीरों पर आधारित एक अलग अध्ययन से पता चलता है कि पराली अब भी जलायी जा रही है। खेतों में आग के 2 से 5 गुना अधिक निशान मिले। पंजाब में 15 सितंबर से 27 अक्टूबर के बीच सैटेलाइट के माध्यम से पराली जलाने की 717 घटनाएं दर्ज की गईं, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 890 घटनाएं सामने आई थीं। अध्ययन के अनुसार, अक्टूबर के अंत और नवंबर की शुरुआत में पराली जलाने का दिल्ली के दैनिक पीएम2.5 प्रदूषण में योगदान 40 प्रतिशत तक हो सकता है।
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