

सीएम ने 3 कॉरिडोर के दावे को किया खारिज
कहा, बंगाल सरकार ने 6 आर्थिक कॉरिडोर पर काम शुरू कर दिया
वोट नहीं मिलेंगे, इसलिए बंगाल को बजट में किया वंचित
सबिता, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : बंगाल में अगले कुछ महीने में विधानसभा का चुनाव होने वाला है। केंद्रीय बजट से यह कयास लगाये गये थे कि कई अहम घोषणाएं हो सकती हैं लेकिन एकाध के अलावा आम लोगों के लिए कोई बड़ी राहत नहीं दिखी। वहीं केंद्रीय बजट में जिस डानकुनी से सूरत तक समर्पित माल ढुलाई गलियारा विकसित करने का प्रस्ताव है उसे भी सीएम ममता बनर्जी उनके द्वारा की गयी पूर्व घोषणा बताया है। उन्होंने याद दिलाया कि डानकुनी फ्रेट कॉरिडोर का प्रस्ताव उन्होंने वर्ष 2009 के रेल बजट में रखा था, मैंने डानकुनी से अमृतसर तक प्रस्ताव रखा था जो पिछले 15 वर्षों से रोका गया था।
6 इकोनॉमिक कॉरिडोर, जंगलसुंदरी कॉरिडोर में 72,000 करोड़ का निवेश
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्रीय बजट 2026–27 में घोषित तीन आर्थिक कॉरिडोर के दावे को खारिज करते हुए कहा कि बंगाल ने पहले ही छह आर्थिक कॉरिडोर की घोषणा कर दी है। पहला कॉरिडोर डानकुनी, बर्दवान, बांकुड़ा, दुर्गापुर और पुरुलिया को जोड़ेगा। दूसरा कल्याणी, बर्दवान, बीरभूम, मालदा, सिलीगुड़ी और कूचबिहार को जोड़ेगा। राज्य छह आर्थिक गलियारों से जुड़ जाएगा। सीएम ने दावा किया कि बजट में तीन आर्थिक गलियारों के बारे में जो कहा गया है, वह सरासर झूठ है। उन्होंने बताया कि पुरुलिया के जंगलसुंदरी कॉरिडोर में 72,000 करोड़ का निवेश किया जायेगा। बंगाल सीमेंट, कोयला और चमड़ा सहित विभिन्न उद्योगों का केंद्र बन गया है। यहां तक कि फ्लिपकार्ट और अमेजन भी डानकुनी, कल्याणी और अन्य स्थानों में कारोबार कर रही हैं। राज्य औद्योगिक केंद्र के रूप में उभर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि अपने रेल मंत्री कार्यकाल के दौरान फ्रेट कॉरिडोर और एंटी-कोलिजन डिवाइस सहित सभी प्रमुख परियोजनाओं को उन्होंने मंजूरी दी थी। वाराणसी के विकास पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि काशी विश्वनाथ हमारी सांस्कृतिक धरोहर है, लेकिन स्थानीय लोगों को बाहर कर बाहरी ठेकेदारों के जरिए उसे “डिज्नीलैंड” में बदला जा रहा है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।
केंद्र सरकार को शासन करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जीएसटी के माध्यम से बंगाल से कर वसूल रही है, लेकिन राज्य के 2 लाख करोड़ से अधिक के विकास फंड को रोके हुए है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को शासन करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है और वह देश की संघीय, आर्थिक, सामाजिक और संवैधानिक संरचना को नुकसान पहुंचा रही है। एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) के मुद्दे पर उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि उसमें हिम्मत है तो लोकतांत्रिक और राजनीतिक रूप से मुकाबला करे। उन्होंने दावा किया कि बंगाल, केरल और तमिलनाडु में भाजपा को हार मिलेगी और असम में भी उसकी हार तय है।