‘जो जिस भाषा में समझे, उसे उसी में समझाएं’

SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट की राय से तृणमूल उत्साहित, कहा : नाम काटने की साजिश नाकाम
‘जो जिस भाषा में समझे, उसे उसी में समझाएं’
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सबिता, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट की राय पर तृणमूल ने खुशी जतायी है। सोमवार को मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य, ब्रात्य बसु तथा सांसद पार्थ भौमिक ने तृणमूल भवन में प्रेस कांफ्रेंस किया और इसे बड़ी जीत करार दिया। चंद्रिमा भट्टाचार्य ने कहा कि जो बातें तृणमूल कह रही थी उसे सुप्रीम कोर्ट ने मान्यता दी है। मंत्री ब्रात्य बसु ने कहा कि बारासात की सभा से अभिषेक बनर्जी ने एक अहम बात कही है। उन्होंने कहा है कि जो जिस भाषा में बात करता है उसे उसी भाषा में समझाना चाहिए। ब्रात्य बसु ने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ज्ञानेश कुमार को तीन बार पत्र दिया। अभिषेक बनर्जी गत साल के अंत में दिल्ली में यहां से डेलिगेशन लेकर गये। उन्होंने चुनाव आयोग से कहा कि बंगाल के लोगों पर जुल्म ना करें लेकिन उनलोगों ने नहीं सुना। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने हमलोगों की प्रत्येक मांग को मान्यता दी और हमें लगता है कि इस राय को चुनाव आयोग के दफ्तर के सामने लगा देना चाहिए। इसलिए अभिषेक बनर्जी ने कहा कि जो जिस भाषा को समझता है उसे उसी भाषा में समझाना चाहिए। मंत्री ब्रात्य बसु ने आरोप लगाया कि एसआईआर के नाम पर बड़ी संख्या में नाम काटने की साजिश चल रही थी मगर इस राय से उनकी मंशा पर पानी फिर गया। लोग कभी आधार कार्ड, कभी वोटर कार्ड, कभी एडमिट कार्ड इन सभी को लेकर दिन - प्रतिदिन दौड़ते रहेंगे, यह भाजपा चाहती थी लेकिन कानून है, अदालत है, देश अब भी पूरी तरह बिक्री नहीं हुआ है। ब्रात्य बसु ने कहा कि बंगाल के लोग देखें कि भाजपा आपलोगों के साथ क्या करना चाहती थी और तृणमूल ने क्या किया।

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