हावड़ा : जन्म के समय बेहद जटिल स्थिति, एक्सिट पद्धति से नवजात को मिला जीवन

नगालैंड दंपति का शिशु था हाइड्रॉप्स फीटालिस से पीड़ित
Exit Procedure Saves Newborn Hydrops Fetalis Howrah Hospital
सांकेतिक फोटो
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निधि, सन्मार्ग संवाददाता

हावड़ा : हावड़ा के एक निजी अस्पताल में नगालैंड के एक दंपति के नवजात बच्चे को बेहद जटिल चिकित्सकीय प्रक्रिया के जरिए नया जीवन मिला है। गर्भावस्था के पांचवें महीने में अल्ट्रासाउंड के दौरान पता चला था कि भ्रूण के फेफड़ों के पास असामान्य रूप से तरल जमा हो रहा है। बाद में जांच में बच्चे के 'हाइड्रॉप्स फीटालिस' से पीड़ित होने की पुष्टि हुई। 31वें सप्ताह में महिला को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू होने पर डॉक्टरों ने आपातकालीन सिजेरियन (C-Section) कराने का फैसला किया, क्योंकि बच्चे के शरीर में तरल जमा होने के कारण खुद से सांस लेना बेहद कठिन था।

हावड़ा के अस्पताल का राज्य में पहली ऐसी प्रक्रिया का दावा

बच्चे की जान बचाने के लिए डॉक्टरों की टीम ने 'एक्सिट' (EXIT - Ex-Utero Intrapartum Treatment) पद्धति अपनाई। इसमें बच्चे को गर्भ से आंशिक रूप से बाहर निकालकर गर्भनाल के जरिए मां से संपर्क बनाए रखा गया। इसी दौरान डॉक्टरों ने बच्चे की श्वांसनली में ट्यूब डालकर कृत्रिम सांस दी और छाती से तरल बाहर निकाला। प्रक्रिया के दौरान ऑक्सीजन का स्तर गिर गया था, जिसे डॉक्टरों ने तुरंत नियंत्रित कर लिया। करीब एक महीने एनआईसीयू (NICU) में रहने के बाद अब ढाई महीने का बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है। अस्पताल का दावा है कि पश्चिम बंगाल में इस पद्धति से हुआ यह पहला सफल उपचार है।

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