

मध्य-पूर्व में तनाव एक बार फिर गहराता दिख रहा है। United States Central Command (CENTCOM) ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है। अमेरिका ने युद्धपोतों और अटैक हेलीकॉप्टरों की तैनाती कर समुद्री गतिविधियों पर सख्त निगरानी शुरू कर दी है।
CENTCOM के अनुसार, USS Rushmore पर तैनात नौसैनिक और मरीन अरब सागर में ब्लॉकेड ऑपरेशन चला रहे हैं। वहीं USS Pinckney और USS New Orleans भी क्षेत्र में गश्त कर रहे हैं और जहाजों की आवाजाही पर नजर रखे हुए हैं।
इसके अलावा USS Canberra को भी तैनात किया गया है। CENTCOM का दावा है कि इस कार्रवाई के चलते ईरान के समुद्री व्यापार पर लगभग पूरी तरह रोक लग गई है। अब तक 23 जहाज अमेरिकी निर्देशों के बाद वापस लौट चुके हैं।
हवाई निगरानी के लिए AH-64 Apache हेलीकॉप्टरों को भी 17 अप्रैल को होर्मुज के ऊपर उड़ते देखा गया। अमेरिकी सेना का कहना है कि यह “फ्रीडम ऑफ नेविगेशन” सुनिश्चित करने के लिए एक मजबूत उपस्थिति है।
यह सैन्य तैनाती ऐसे समय में बढ़ी है जब ईरान ने हाल ही में होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के फैसले को पलटते हुए फिर से जहाजों की आवाजाही पर रोक के संकेत दिए हैं। ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिकी ब्लॉकेड जारी रहेगा, तब तक वह भी कड़े प्रतिबंध लागू रखेगा।
इससे पहले Donald Trump ने साफ कहा था कि जब तक ईरान अमेरिका के साथ परमाणु कार्यक्रम समेत अन्य मुद्दों पर समझौता नहीं करता, तब तक यह दबाव जारी रहेगा।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक तेल आपूर्ति का करीब 20% संभालता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की बाधा का असर सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ सकता है और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है।
हालांकि, बढ़ते तनाव के बीच यह भी संकेत मिल रहे हैं कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत आगे बढ़ सकती है और 22 अप्रैल की तय समयसीमा से पहले किसी समझौते की संभावना बन रही है।