SIR सुनवाई के खौफ में वृद्ध की मौत ! रेल पटरी से मिला शव

Elderly man dies out of fear of SIR (Special Investigation Team) hearing! Body found near railway tracks.
सांकेतिक फोटो
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निधि, सन्मार्ग संवाददाता

बारासात : बुधवार सुबह उत्तर 24 परगना के गुमा बेलतला स्थित 22 नंबर रेलगेट के पास से 72 वर्षीय निखिल चंद्र दास का शव बरामद किया गया। निखिल पेशे से बढ़ई थे। परिवार का आरोप है कि उन्हें देश से निकाले जाने का गहरा डर सता रहा था, जिसके कारण उन्होंने यह घातक कदम उठाया।

घटना की पृष्ठभूमि और 'एसआईआर' का डर

परिजनों के अनुसार, निखिल चंद्र दास को बुधवार को ही एसआईआर (SIR) सुनवाई के लिए बुलाया गया था। मृतक के बेटे लिटन दास ने बताया कि उनके पिता पिछले कई दिनों से इस सुनवाई को लेकर भारी मानसिक तनाव और आतंक में थे। यद्यपि निखिल दास पिछले 35 वर्षों से भारत के नागरिक थे और उनके पास वैध पासपोर्ट सहित अन्य सभी सरकारी दस्तावेज मौजूद थे, लेकिन 2002 की मतदाता सूची में उनका नाम नहीं होने के कारण उन्हें सुनवाई का नोटिस थमाया गया था।

बेटे का कहना है कि परिवार ने उन्हें काफी समझाने की कोशिश की थी कि उनके पास पर्याप्त दस्तावेज हैं और उन्हें डरने की जरूरत नहीं है, लेकिन वे इस बात से डरे हुए थे कि उन्हें विदेशी घोषित कर देश से निकाल दिया जाएगा। मंगलवार शाम वह घर से निकले थे और फिर वापस नहीं लौटे।

तृणमूल और भाजपा के बीच शुरू हुआ राजनीतिक वार-पलटवार

इस मौत ने स्थानीय स्तर पर बड़े राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है। स्थानीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेतृत्व तुरंत पीड़ित परिवार के समर्थन में खड़ा हो गया है। टीएमसी नेता मोनी गाजी ने इस घटना के लिए सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की साजिशों और नीतियों के कारण ही आम लोगों के मन में ऐसा खौफ पैदा हो रहा है, जिससे उनकी जान जा रही है।

दूसरी ओर, भाजपा ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। अशोकनगर के भाजपा महासचिव भूपति बागची ने दावा किया कि मौत के पीछे पारिवारिक कारण हो सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वृद्ध का अपने बेटों के साथ जमीन-जायदाद को लेकर विवाद चल रहा था। भाजपा ने तृणमूल पर पलटवार करते हुए कहा कि वे इस दुखद मृत्यु का राजनीतिक लाभ उठाने के लिए इसे 'एसआईआर' का रंग दे रहे हैं।

पुलिस की कार्रवाई

रेल पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस का प्रारंभिक अनुमान है कि यह आत्महत्या का मामला हो सकता है, लेकिन वे दुर्घटना और अन्य सभी संभावित पहलुओं की भी जांच कर रहे हैं। इस घटना ने एक बार फिर नागरिकता और दस्तावेजों की जांच से जुड़े मानवीय पहलुओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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