ईईजेड नियम 2025: मत्स्य विभाग ने पास को अनिवार्य किया

ईईजेड नियम 2025: मत्स्य विभाग ने पास को अनिवार्य किया
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सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजयपुरम : मत्स्य विभाग और अंडमान एवं निकोबार प्रशासन ने सभी मछुआरों, नौका मालिकों और मत्स्य हितधारकों को सूचित किया है कि भारत सरकार ने “भारत के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र में मत्स्य संसाधनों के सतत दोहन नियम, 2025” अधिसूचित कर दिए हैं। इन नियमों का मुख्य उद्देश्य गहरे समुद्र में मत्स्य पालन के लिए पारदर्शी, टिकाऊ और निर्यातोन्मुखी ढांचा सुनिश्चित करना है। अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के लिए ये नियम विशेष महत्व रखते हैं, क्योंकि यह क्षेत्र भारत के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के लगभग एक-तिहाई हिस्से को शामिल करता है। विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र तटरेखा से 200 समुद्री मील तक विस्तारित होता है, जहां भारत को समुद्री संसाधनों के खोज, संरक्षण और प्रबंधन के विशेष अधिकार प्राप्त हैं।

नियमों के प्रमुख उद्देश्य:
विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र नियम 2025 का उद्देश्य सतत मत्स्य पालन को बढ़ावा देना, समुद्री सुरक्षा और संरक्षा में सुधार करना, मछुआरों की आय में वृद्धि करना तथा समुद्री उत्पादों के मूल्य संवर्धन और निर्यात क्षमता को सुदृढ़ करना है। इसके तहत सभी पात्र नौकाओं को “एक्सेस पास” अनिवार्य रूप से प्राप्त करना होगा।

एक्सेस पास की जानकारी:
यह पास केवल उन नौकाओं के लिए अनिवार्य है जो विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र में मत्स्य गतिविधियां संचालित करती हैं। इसका उद्देश्य विनियमित मत्स्य पालन, बेहतर निगरानी, सुरक्षा और कानूनी संचालन सुनिश्चित करना है। पास ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से रियलक्राफ्ट पोर्टल पर आवेदन कर प्राप्त किया जा सकता है।

कौन किन नौकाओं के लिए अनिवार्य है:
यह पास सभी यांत्रिक नौकाओं, 24 मीटर या उससे अधिक लंबाई वाली मोटर चालित नौकाओं और पोल एंड लाइन नौकाओं के लिए अनिवार्य है। वहीं, 24 मीटर से कम लंबाई वाली पारंपरिक मोटर चालित नौकाएं जो टूना मत्स्य पालन में संलग्न नहीं हैं, तथा गैर-मोटर चालित पारंपरिक नौकाएं इससे मुक्त रहेंगी।

विभाग ने पात्र नौका मालिकों से आग्रह किया है कि वे शीघ्र आवेदन करें, ताकि नियमों का पालन करते हुए मत्स्य गतिविधियां जारी रह सकें। विभाग का यह भी कहना है कि नियमों के पालन से न केवल समुद्री संसाधनों का संरक्षण होगा, बल्कि मछुआरों की आय और निर्यात क्षमता में भी सुधार होगा।

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