बंगाल के 25 IAS-IPS अधिकारी दिल्ली तलब

2026 विधानसभा चुनाव : अनिवार्य ब्रीफिंग में शामिल होने का आदेश

बंगाल के 25 IAS-IPS अधिकारी दिल्ली तलब
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गैरहाजिरी पर होगी लख्त कार्रवाई

केडी पार्थ, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : पश्चिम बंगाल में 2026 विधानसभा चुनाव को लेकर भारत निर्वाचन आयोग ने प्रशासनिक स्तर पर कमर कस ली है। चुनावी प्रक्रिया को निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और पारदर्शी बनाए रखने के लिए आयोग ने पश्चिम बंगाल कैडर के 25 वरिष्ठ IAS और IPS अधिकारियों को केंद्रीय पर्यवेक्षक के रूप में नयी दिल्ली बुलाया है। इनमें बंगाल के गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीणा भी शामिल हैं। यह अनिवार्य ब्रीफिंग 5 और 6 फरवरी 2026 को इंडिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट (IIDEM), द्वारका में आयोजित होगी।

15 IAS अधिकारियों को होना होगा शामिल

निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आदेश में पश्चिम बंगाल कैडर के जिन IAS अधिकारियों को ब्रीफिंग के लिए बुलाया गया है, उनमें शामिल हैं—

अश्विनी कुमार यादव, सलीम पी. बी., अवनीन्द्र सिंह, सौमित्र मोहन, स्मारकी महापात्र, अर्चना, जगदीश प्रसाद मीणा, संजय बंसल, पी. मोहनगांधी, शुभांजन दास, पी. उलगानाथन, सौरव पहाड़ी, रचना भगत, ऋतेंद्र नारायण बसु रॉय चौधरी और राजनवीर सिंह कपूर। ये सभी अधिकारी 6 फरवरी 2026 को सुबह 9 बजे से होने वाली ब्रीफिंग में शामिल होंगे।

10 IPS अधिकारियों को भी निर्देश

पश्चिम बंगाल कैडर के IPS अधिकारियों को भी केंद्रीय पर्यवेक्षक ब्रीफिंग में शामिल होने का निर्देश दिया गया है। सूची में भरत लाल मीणा, राजेश कुमार यादव, प्रवीण कुमार त्रिपाठी, ऋषिकेश मीणा, सव्यसाची रमन मिश्रा, सुनील कुमार चौधरी, अखिलेश कुमार चतुर्वेदी, सुकेश कुमार जैन, अनूप जायसवाल और सुधीर कुमार नीलकंठम शामिल हैं। इन अधिकारियों को 5 फरवरी को सुबह 9 बजे IIDEM, दिल्ली के द्वारका में रिपोर्ट करनी होगी।

आचार संहिता और निगरानी पर फोकस

ब्रीफिंग कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल के लिए अलग से इनपुट सत्र रखा गया है। मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट, संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी, चुनावी हिंसा की रोकथाम और प्रशासनिक निष्पक्षता पर वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा विशेष मार्गदर्शन दिया जाएगा। आयोग का मानना है कि पश्चिम बंगाल जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील राज्य में हर स्तर पर सतर्कता जरूरी है।

ईवीएम, वोटर लिस्ट और चुनाव खर्च पर प्रशिक्षण

ब्रीफिंग में ईवीएम-वीवीपैट प्रबंधन, मतदाता सूची की शुद्धता, चुनावी खर्च की निगरानी और आईटी एप्लिकेशन के उपयोग पर मिनट-टू-मिनट कार्यक्रम तय किया गया है। इन विषयों पर कानूनी प्रावधानों और आयोग के दिशा-निर्देशों को विस्तार से समझाया जाएगा।

मीडिया और सोशल मीडिया पर भी रहेगी पैनी नजर

निर्वाचन आयोग ने मीडिया संबंधी मामलों के लिए भी अलग सत्र रखा है। फर्जी खबरों, भ्रामक प्रचार और सोशल मीडिया के दुरुपयोग को रोकने के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षकों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए जाएंगे, ताकि पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल खराब न हो।

कार्रवाई की चेतावनी

आयोग ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि ब्रीफिंग बैठक में बिना अनुमति अनुपस्थित रहने वाले अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को निर्देश दिया गया है कि 24 घंटे के भीतर नोटिस की तामील कराकर उसकी लिखित पुष्टि आयोग को भेजी जाए।

उपचुनावों को लेकर भी तैयारी

यह ब्रीफिंग केवल 2026 विधानसभा चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य में होने वाले उपचुनावों को ध्यान में रखते हुए भी आयोजित की जा रही है। आयोग का उद्देश्य है कि पश्चिम बंगाल में किसी भी चुनावी प्रक्रिया पर सवाल न उठे।

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