DRDO के स्वदेशी लाइट टैंक का लद्दाख में होगा यूजर ट्रायल, ‘नाग Mk-2’ मिसाइल से लैस होगा टैंक

DRDO के स्वदेशी लाइट टैंक का लद्दाख में होगा यूजर ट्रायल, ‘नाग Mk-2’ मिसाइल से लैस होगा टैंक

सूत्रों के मुताबिक अब सेना को यह लाइट टैंक जून या जुलाई में यूजर ट्रायल के लिए मिलेगा। इसे डीआरडीओ ने विशेष रूप से लद्दाख जैसे दुर्गम और ऊंचाई वाले इलाकों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया है।
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अंजलि भाटिया

भारतीय सेना को पहाड़ों में दुश्मन की चाल रोकने के लिए जिस स्वदेशी लाइट टैंक ‘जोरावर’ का बेसब्री से इंतजार है। पहले इसे 2025 की शुरुआत में यूजर ट्रायल के लिए सेना को सौंपा जाना था, फिर सर्दियों तक की समयसीमा तय हुई, लेकिन अब यह डेडलाइन भी आगे खिसक गई है। सूत्रों के मुताबिक अब सेना को यह लाइट टैंक जून या जुलाई में यूजर ट्रायल के लिए मिलेगा। इसे डीआरडीओ ने विशेष रूप से लद्दाख जैसे दुर्गम और ऊंचाई वाले इलाकों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया है।

सूत्रों के अनुसार एक ‘जोरावर’ तैयार है और दूसरा निर्माणाधीन है। गर्मियों में दोनों टैंक सेना को सौंपे जा सकते हैं। इसके बाद लद्दाख में इनका यूजर ट्रायल होगा, जहां असली परीक्षा चीन की चुनौती के सामने होगी। डीआरडीओ प्रमुख पहले ही संकेत दे चुके हैं कि अगले 2-3 वर्षों में जोरावर सेना का हिस्सा बनना शुरू हो जाएगा।

‘नाग Mk-2’ मिसाइल से लैस होगा जोरावर

सेना के लिए तैयार हो रहे इन लाइट टैंकों की सबसे बड़ी ताकत होगी ‘नाग Mk-2’ मिसाइल। यह तीसरी पीढ़ी की अत्याधुनिक फायर एंड फॉरगेट एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल (ATGM) है। इसके सफल फील्ड ट्राडीआरडीओ के स्वदेशी लाइट टैंक का लद्दाख में होगा यूजर ट्रायल, ‘नाग Mk-2’ मिसाइल से लैस होगा टैंकयल 2024 में पूरे हो चुके हैं। जोरावर का वजन करीब 25 टन होगा और भारतीय सेना लगभग 350 लाइट टैंक शामिल करने की तैयारी में है।

पूर्वी लद्दाख में गलवान संघर्ष के बाद सेना ने साफ समझ लिया कि ऊंचाई वाले मोर्चों पर भारी टैंक हर बार कारगर नहीं। पैंगोंग झील क्षेत्र में तनाव के दौरान चीन की बढ़त ने भारत को यह सबक दिया कि पहाड़ी युद्ध के लिए हल्के, तेज और आधुनिक टैंक जरूरी हैं। भारत ने जवाबी रणनीति में पैंगोंग के दक्षिणी किनारे की अहम चोटियों पर कब्जा कर चीन को चौंका दिया था। वहां T-72 और T-90 जैसे भारी टैंक पहुंचाए गए, जिससे चीन बैकफुट पर आया और बातचीत की मेज पर पीछे हटने को मजबूर हुआ। लेकिन सेना मानती है कि ये टैंक मुख्य रूप से मैदानी और रेगिस्तानी इलाकों के लिए हैं, जबकि लद्दाख जैसे ऊंचे मोर्चों के लिए जोरावर जैसे लाइट टैंक गेमचेंजर साबित होंगे।

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