

कोलकाता : तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ममता बनर्जी ने रविवार को एक पोस्ट में कहा कि घरों से लेकर हॉकर्स तक, गरीब लो राजनीतिक अहंकार की कीमत चुका रहे हैं। बंगाल में बुलडोजर की राजनीति नहीं चलती। टैगोर और नेताजी की धरती पर भय, बल और विध्वंस के जरिए शासन नहीं किया जा सकता। आज हम जो देख रहे हैं, वह बंगाल के लोगों की गरिमा पर हमला है। दिहाड़ी मजदूर, स्ट्रीट विक्रेताओं, छोटे दुकानदार और संघर्षरत परिवार जिन्होंने ईंट-ईंट जोड़कर अपना जीवन बनाया है। हावड़ा स्टेशन के आसपास बड़े पैमाने पर बेदखली अभियान, तिलजला और पार्क सर्कस की सड़कों पर भड़कता असंतोष और आक्रोश, और अचानक बेघर और आजीविका से वंचित हुए लोगों में बढ़ती हताशा एक ऐसी सरकार को उजागर करती है जो मानवता से अधिक दिखावे को महत्व देती है। जो सरकार पहले विध्वंस करती है और बाद में सुनती है, वह बंगाल की आत्मा को ही भूल चुकी है। वास्तविक प्रगति इस बात से मापी जाती है कि कोई राज्य अपने सबसे कमजोर नागरिकों के साथ कैसा व्यवहार करता है, न कि इस बात से कि वह उन्हें कितनी जल्दी मिटा सकता है। संस्कृति, करुणा और दमन के प्रतिरोध पर निर्मित राज्य में बुलडोजर शासन की भाषा नहीं बन सकते।