

नई दिल्ली : कर्नाटक के मुख्यमंत्री आवास 'अनुग्रह' को लेकर पिछले काफी सालों से ऐसी धारणा बनी हुई, जिसकी वजह से वहां कोई रहना नहीं चाहता है। कई मुख्यमंत्री यहां रहे, लेकिन कुछ दिनों के बाद ही इसे छोड़ दिया। कुछ मुख्यमंत्रियों की राजनीतिक स्थिति यहां रहते हुए डगमगा गई। ऐसे में कर्नाटक के मुख्यमंत्री आवास के साथ 'मनहूस' शब्द जुड़ गया। ऐसी खबरें हैं कि कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार भी 'अनुग्रह' में नहीं रहेंगे।
डीके शिवकुमार, वास्तु और एस्ट्रोलॉजी में काफी विश्वास रखते हैं, इसलिए वह इस इमारत में वास्तु के हिसाब से कुछ बदलाव करा रहे हैं। कर्नाटक पीडब्ल्यूडी विभाग के मुताबिक, इन बदलावों को करने में लगभग 3 महीने का समय लगेगा। इसके बाद ही मुख्यमंत्री यहां शिफ्ट हो पाएंगे।
डीके शिवकुमार बेंगलुरु स्थित 'कुमारकृपा' में रहने की योजना बना रहे हैं, जो एक 160 साल पुरानी हेरिटेज बिल्डिंग है। डीके शिवकुमार 'कुमारकृपा' में अपने हिसाब से कुछ रिनोवेशन भी करा रहे हैं, जिस पर जेडीएस ने आपत्ति जताई है। 'कुमारकृपा' को अभी तक सरकार के गेस्ट हाउस के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है। जरूरी मंजूरी मिलने के बाद पीडब्ल्यूडी इन दिनों 'कुमारकृपा' में जरूरी बदलाव करवा रहा है, जिसमें 6 फीट की बाउंडरी भी शामिल है। डीके शिवकुमार, वास्तु और एस्ट्रोलॉजी में काफी विश्वास रखते हैं, इसलिए वह इस इमारत में वास्तु के हिसाब से कुछ बदलाव करा रहे हैं। कर्नाटक पीडब्ल्यूडी विभाग के मुताबिक, इन बदलावों को करने में लगभग 3 महीने का समय लगेगा। इसके बाद ही मुख्यमंत्री यहां शिफ्ट हो पाएंगे। ऐसा माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार 'कुमारकृपा' में दशहरा के मौके पर आ सकते हैं।
'अनुग्रह' को कर्नाटक के मुख्यमंत्री के सरकारी आवास के तौर पर बनाया गया था, लेकिन समय के साथ कई मुख्यमंत्रियों ने या तो वहां रहने से परहेज किया, या वहां रहने के कुछ ही समय बाद उसे छोड़ दिया। कुछ मुख्यमंत्रियों की वहां रहते हुए संयोगवश सरकारें मुश्किलों में घिर गईं। ऐसे में राजनीतिक स्टाफ, नौकरशाहों और पार्टी कार्यकर्ताओं ने एक पैटर्न देखा और मजाक-मजाक में कहना शुरू कर दिया कि यह घर मनहूस है। धीरे-धीरे यह बात एक मान्यता बन गई। हालांकि, यह अंधविश्वास किसी भूतिया कहानी, दुखद घटना, मौत या दर्ज की गई किसी अलौकिक घटना से नहीं जुड़ा है, बल्कि इसकी जड़ें राजनीतिक संयोगों में हैं। शायद यही वजह है कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भी यहां रहना ठीक नहीं समझा।
हालांकि, यह अंधविश्वास किसी भूतिया कहानी, दुखद घटना, मौत या दर्ज की गई किसी अलौकिक घटना से नहीं जुड़ा है, बल्कि इसकी जड़ें राजनीतिक संयोगों में हैं।
कर्नाटक में ऐसा कहा जाता है कि मुख्यमंत्री आवास 'अनुग्रह' में रहने वाले कई मुख्यमंत्रियों का कार्यकाल लंबा या स्थिर नहीं रहा। जब भी कोई मुख्यमंत्री वहां रहने के बाद सत्ता से बाहर हुआ, तो इस आवास को ही इसके लिए जिम्मेदार ठहराया गया। सफल या लंबे समय तक पद पर रहने वाले जिन मुख्यमंत्रियों ने दूसरे आवासों को चुना, उन्होंने इस धारणा को और मजबूत किया।
विभिन्न सरकारों ने वास्तु दोषों को दूर करने के लिए काफी बदलाव किये, कई कमरों में भी बदला किए गए। पूजा-अनुष्ठान भी किये गए, लेकिन बात नहीं बनी। हालांकि, असल वास्तु दोष क्या है, इस पर कभी कोई आम सहमति नहीं बन पाई
कुछ राजनेताओं और ज्योतिषियों का दावा था कि मुख्यमंत्री आवास 'अनुग्रह' की दिशा अशुभ है। कहा जाता है कि विभिन्न सरकारों ने वास्तु दोषों को दूर करने के लिए काफी बदलाव किये, कई कमरों में भी बदला किए गए। पूजा-अनुष्ठान भी किये गए, लेकिन बात नहीं बनी। हालांकि, असल वास्तु दोष क्या है, इस पर कभी कोई आम सहमति नहीं बन पाई। ऐसे में मुख्यमंत्री निवास 'मुख्मंत्री' का इंतजार ही करता रहा है।
जनता दल (सेक्युलर) ने 'कुमारकृपा' में हो रहे रेनोवेशन को गलत और इतिहास को खत्म करने की दिशा में उठाया गया कदम बताया है। एक्स पोस्ट में जेडीएस ने कहा, 'बेंगलुरु की पहचान, 160 साल पुरानी हेरिटेज बिल्डिंग 'कुमारकृपा' में डीके शिवकुमार अपने निजी फायदे के लिए बदलाव कर रहे हैं। यह बेहद निंदनीय और शर्मनाक है। चाहे कावेरी हो या अनुग्रह रेजिडेंसी, इतिहास को खत्म करने का यह कदम न सिर्फ अहंकारपूर्ण है, बल्कि बेवकूफी की हद है !