

नई दिल्लीः सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीएस) ने पश्चिम एशिया में बदलती स्थिति की समीक्षा की और क्षेत्र में रहने वाले बड़े भारतीय प्रवासी समुदाय की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की। सीसीएस ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश भी दिया है कि वे घटनाक्रम से प्रभावित भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए आवश्यक एवं व्यवहार्य कदम उठाएं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में रविवार रात हुई बैठक में सीसीएस ने संघर्ष की स्थिति को शीघ्र समाप्त करने और संवाद एवं कूटनीति के जरिए मामले का हल निकालने के महत्व पर भी जोर दिया। सीसीएस देश के सुरक्षा संबंधी और रणनीतिक मामलों पर निर्णय लेने वाला सर्वोच्च निकाय है।
एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि सीसीएस ने पश्चिम एशिया में उत्पन्न हो रही स्थिति की समीक्षा करने के लिए बैठक की और उसे ईरान में हुए हवाई हमलों और उसके बाद कई खाड़ी देशों में हुए हमलों सहित बढ़ते तनाव के बारे में जानकारी दी गई। बयान में कहा गया है, ‘‘उसने क्षेत्र में रहने वाले बड़े भारतीय प्रवासी समुदाय की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है।’’
सीसीएस ने पश्चिम एशिया से होकर गुजरने वाले भारतीय यात्रियों और निर्धारित परीक्षाओं में शामिल हो रहे छात्रों के सामने आने वाली कठिनाइयों के साथ-साथ क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक एवं वाणिज्यिक गतिविधियों पर पड़ने वाले व्यापक प्रभावों की भी समीक्षा की। बयान के अनुसार, ‘‘सीसीएस ने सभी संबंधित विभागों को घटनाक्रम से प्रभावित भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए आवश्यक और व्यवहार्य कदम उठाने का निर्देश दिया। उसने संघर्ष की स्थिति को शीघ्र समाप्त करने और संवाद एवं कूटनीति की ओर लौटने के महत्व पर बल दिया।’’
ईरान पर अमेरिका और इजराइल द्वारा किए गए हमले और ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के मारे जाने के बाद उत्पन्न हुई स्थिति का जायजा लेने के लिए सीसीएस की बैठक बुलाई गई थी। ईरान ने इस हमले का जवाब देते हुए खाड़ी क्षेत्र में स्थित इजराइल और अमेरिकी सैन्य ठिकानों के साथ-साथ वैश्विक व्यापार केंद्र दुबई पर ड्रोन और मिसाइलों से हमला किया।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस जयशंकर और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बैठक में उपस्थित थे। सीसीएस की बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा और शक्तिकांत दास, प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल अनिल चौहान, कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन और विदेश सचिव विक्रम मिसरी भी उपस्थित थे।
ईरान में लगभग 10,000 भारतीय नागरिक रहते, पढ़ते और काम करते हैं, जबकि इज़राइल में 40,000 से अधिक भारतीय नागरिक रहते हैं। खाड़ी देशों और पश्चिम एशिया में रहने वाले भारतीयों की संख्या लगभग 90 लाख है। वर्तमान में पश्चिम एशिया का हवाई क्षेत्र लगभग बंद है।