

कहा अभी बाकी हैं दो मांगें
मुनमुन, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कोलकाता के छात्र-छात्राओं में उल्लास का माहौल है। उनका कहना है कि एक मांग तो पूरी हुई पर अभी दो बाकी हैं। लिहाजा आंदोलन का दौर जार रहेगा। छात्र संगठनों ने इस इस्तीफे को एतिहासिक जीत बताया है। दिल्ली के
NEET प्रश्न पत्र लीक मामले और देशव्यापी छात्र आंदोलनों के दबाव के चलते मंत्री को आखिरकार अपने पद से ह्टना पड़ा है। हालांकि आंदोलनकारियों के मुख्य रूप से 3 बड़े दावे थे पहला शिक्षा मंत्री का इस्तीफा, दूसरा NTA को भंग करना और तीसरा परीक्षा घोटाले में शामिल दोषियों को कड़ी सजा दिलाना। इनमें से पहला लक्ष्य पूरा हो चुका है, लेकिन शेष मांगों को लेकर संघर्ष जारी रहेगा।
NTA और NEP रद्द करने की उठी मांग
विभिन्न छात्र संगठनों और शिक्षकों ने अपनी तीखी और स्पष्ट प्रतिक्रियाएं दी हैं। AISF के प्रेसिडेंट सौमेन हालदार ने इसे देश भर के छात्र और युवा आंदोलन की एक ऐतिहासिक जीत करार दिया है। उनका कहना है कि धर्मेंद्र प्रधान को काफी पहले ही इस्तीफा दे देना चाहिए था। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक NTA और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को पूरी तरह रद्द नहीं किया जाता तथा प्रदर्शनकारियों पर दर्ज झूठे मामले वापस नहीं होते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग हुई तेज
इसी कड़ी में बंगिया शिक्षक व शिक्षकर्मी समिति के महासचिव स्वपन मंडल ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को अंततः छात्रों के सामने झुकना ही पड़ा। इतिहास गवाह है कि सरकारों को कभी भी छात्र समुदाय के भविष्य से खिलवाड़ नहीं करना चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से पुरजोर मांग की है कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी मुकदमे तुरंत खारिज किए जाएं। शिक्षा व्यवस्था में सुधार और पारदर्शिता को लेकर छात्रों का आक्रोश अभी भी शांत नहीं हुआ है। आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर यह मुद्दा और अधिक तुल पकड़ सकता है।