देहरादून : उत्तराखंड सरकार ने कहा है कि उत्तरकाशी में बादल फटने के बाद आयी आपदा में तबाह हुआ धराली गांव अब दोबारा उस जगह नहीं बसेगा। इस बीच धराली की तबाही से भागीरथी नदी में तेल गाड क्षेत्र से गिरे मलबे के कारण नदी का प्रवाह रुक गया है. जिससे लगभग 1200 मीटर लंबी एक कृत्रिम झील बन गयी है। यही झील अब इस घाटी के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही है।
उच्चस्तरीय बैठक में लिया गया निर्णय
अपर सचिव बंशीधर तिवारी ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में निर्णय लिया गया कि धराली गांव सुरक्षित जगह पर बसाया जायेगा। नदियों के किनारे और भूस्खलन वाले संवेदनशील क्षेत्रों में कोई भी नया निर्माण नहीं होगा। इस तरह की संवेदनशील जगहों वाले अन्य गांव भी शिफ्ट किये जा सकते हैं। फिलहाल आपदा के 7 दिन बाद भी धराली गांव लाखों टन मलबे में दबा है।
झील के जलस्तर में लगातार वृद्धि हो रही
धराली गांव के मलबे से गिरे मलबे के कारण भागीरथी नदी का प्रवाह रुक गया और एक कृत्रिम झील बन गयी। झील के जलस्तर में लगातार वृद्धि हो रही है जिससे हार्षिल घाटी में बाढ़ का गंभीर खतरा बन गया है। सोमवार रात हुई लगातार बारिश के चलते झील को पंचर करने की योजना को भी फिलहाल रोक दिया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि झील में पानी का स्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे पूरे हार्षिल घाटी में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है हालांकि तमाम मुश्किलों के बावजूद सेना और स्थानीय प्रशासन स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सक्रिय है। सेना झील के पानी को निकालने के लिए एक वैकल्पिक रास्ता तैयार करने की कोशिशों में जुटी है।
उफनती नदी से बाढ़ का खतरा
मौसम की चुनौती और कठिन भौगोलिक परिस्थितियां राहत कार्यों में बाधा बन रही है। झील के बढ़ते जलस्तर ने घाटी के निवासियों और पर्यटकों के बीच चिंता बढ़ा दी है। प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है और संभावित खतरे को देखते हुए राहत और बचाव दलों को तैनात किया गया है. गत 5 अगस्त को खीर गाड में आयी भीषण बाढ़ से धराली गांव में जमा हुए मलबे में लापता लोगों के जीवित होने की संभावना कम होती जा रही है।