उत्तरकाशी : उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली गांव में आयी प्राकृतिक आपदा को 5 दिन बीत चुके हैं लेकिन अभी तक धराली से सड़क संपर्क नहीं बन पाया है। धराली, गंगोत्तरी से हेलिकॉप्टर के जरिये वहां फंसे लोगों काे सुरक्षित निकाला जा चुका है लेकिन धराली के हादसे में कितने लोग लापता हुए, इसका आंकड़ा अभी तक तक नहीं मिल सका है। हालांकि प्रशासन तलाश अभियान समाप्त करने का ऐलान कर चुका है लेकिन सेना के जवानों सहित लापाता लोगों की तलाश जारी है।
धराली तक पहुंचने में 6 बड़ी चुनौतियां
उत्तरकाशी जिले के धराली में 5 अगस्त को दोपहर 1.45 बजे बादल फट गया था। खीर गाड़ में बाढ़ आने से 34 सेकेंड में धराली गांव जमींदोज हो गया था। अब तक 6 मौतों की पुष्टि हो चुकी है जबकि सेना के एक जेसीओ और 7 जवानों सहित 200 से ज्यादा लोग ‘लापता’ बताये जाते हैं, वे मलबे में दबे हो सकते हैं। जिला मुख्यालय उत्तरकाशी से धराली तक पहुंचने में 6 बड़ी चुनौतियां है। सबसे पहले मनेरी का भूस्खलन है, जहां 50 मीटर तक सड़क बह गयी हालांकि भूस्खलन के बाद सक्रिय हुई सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की टीम ने यहां अस्थायी सड़क बना ली है। मनेरी से आगे फिर भटवाड़ी का भूस्खलन नजर आता है। वहां करीब 40 मीटर तक सड़क गायब हो गयी है। भटवाड़ी में जिस जगह सड़क टूटी वहां भी अस्थायी सड़क बनायी जा चुकी है। भटवाड़ी से आगे पापड़ गाड़ आता है, जहां करीब 150 मीटर की सड़क गायब हो गयी हालांकि बीआरओ ने यहां अस्थायी सड़क बना ली है।
जान जोखिम में डालने वाली पहुंच
इन तीन चुनौतियों को पार करने के बाद गंगवानी आता है जहां पुल तबाह हो चुका है। जिस कारण उत्तरकाशी से धराली या गंगोत्तरी की ओर जाने वाली गाड़ियां पिछले कई दिनों से यहीं अटकी हैं। हालांकि गगवानी में बीआरओ की टीम लोहे का अस्थायी पुल बना चुकी है लेकिन डबरानी में फिर एक और भूस्खलन दिखता है जहां 50 मीटर सड़क बह गयी है। इन सबकि मदद से जान जोखिम में डालकर धराली तक पैदल पहुंचा जा सकता है।