गंगासागर से लौट रहे हैं श्रद्धालुओं ने कहा : पुण्य की डुबकी के बाद हम धन्य हो गये

गंगासागर से लौट रहे हैं श्रद्धालुओं ने कहा : पुण्य की डुबकी के बाद हम धन्य हो गये
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गंगासागर में प्रशासनिक व्यवस्था की जमकर सराहना की

सबिता, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : मकर संक्रांति पर पुण्य स्नान के बाद लाखों पुण्यार्थी अपने-अपने घर को लौटने लगे हैं। पुण्य स्नान के समापन के बाद अब बाबूघाट पर श्रद्धालुओं के लौटने की भीड़ है। श्रद्धालुओं का कहना है कि गंगासागर में पुण्य स्नान के बाद वह एक आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ लौट रहे हैं। पुण्य स्नान के उपरांत श्रद्धालु आध्यात्मिक ऊर्जा और शांति से अभिभूत नजर आये। श्रद्धालु अपने साथ गंगाजल, पूजा सामग्री और पवित्र स्मृतियां लेकर घर लौट रहे हैं। भक्तों का कहना है कि इस दिव्य स्नान से उनका मन शुद्ध हुआ और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ है। श्रद्धालुओं ने कहा कि इस पुण्य स्नान से मानों हम धन्य हो गये। इस महापर्व में बिहार, गुजरात, उत्तर प्रदेश सहित देश के कोने-कोने से श्रद्धालु गंगासागर पहुंचे थे। नेपाल से भी बड़ी संख्या में भक्त इस पुण्य अवसर का साक्षी बने। गंगासागर मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, भक्ति और सनातन परंपरा की जीवंत अभिव्यक्ति है।

धन्य और अत्यंत आनंदित महसूस कर रहे हैं

गंगासागर से लौट रहे श्रद्धालुओं ने प्रशासन द्वारा की गई व्यवस्थाओं की खुलकर सराहना की है। गया से आए भक्तों की एक टोली ने बताया कि गंगासागर में सुरक्षा, सुविधा और सेवा का उत्कृष्ट प्रबंध किया गया था। श्रद्धालु प्रभा देवी ने कहा कि गंगासागर में पुण्य स्नान कर उनका मन आनंद और भक्ति से भर गया। सुविधाएं भी खूब रहीं। गंगासागर में भोजन, चिकित्सा और अन्य आवश्यक सुविधाएं अत्यंत सुचारु रूप से उपलब्ध थीं, जिससे किसी प्रकार की परेशानी नहीं हुई। एक अन्य श्रद्धालु जे. सिंह ने बताया कि वे तीसरी बार गंगासागर आए हैं और हर बार की तरह इस बार भी व्यवस्था बेहतर रही। उन्होंने कहा कि इतने बड़े आयोजन के बावजूद कहीं कोई अव्यवस्था नहीं दिखी। पहली बार गंगासागर पहुंचीं महिला पुण्यार्थी विचिंता देवी ने कहा कि यहां आकर उन्हें बहुत अच्छा लगा और सभी व्यवस्थाओं से वे बेहद संतुष्ट हैं। वहीं नेपाल से आए श्रद्धालुओं ने बताया कि वे 11 जनवरी को ही गंगासागर पहुंच चुके थे। उन्होंने कहा कि रहने, खाने और चिकित्सा सहित सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। पुण्य स्नान के बाद वे स्वयं को धन्य और अत्यंत आनंदित महसूस कर रहे हैं।

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