

सन्मार्ग संवाददाता
श्री विजयपुरम : दक्षिण अंडमान जिले की जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति ‘दिशा’ की बैठक अंडमान तथा निकोबार द्वीपसमूह के सांसद बिष्णु पद रे की अध्यक्षता में दक्षिण अंडमान जिला परिषद के सम्मेलन हॉल में आयोजित की गई। बैठक में दक्षिण अंडमान के उपायुक्त अर्जुन शर्मा, संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, और पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित थे। बैठक में केंद्र सरकार, केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन और स्थानीय निकायों की भूमिकाओं को नियंत्रित करने वाले संवैधानिक ढांचे के भीतर विकासात्मक पहलों की निगरानी सुधारने पर जोर दिया गया। सांसद ने दक्षिण अंडमान की विकासात्मक प्राथमिकताओं को पूरा करने के लिए सहयोगात्मक शासन और सरकारी योजनाओं के समय पर क्रियान्वयन के महत्व पर विशेष ध्यान केंद्रित किया। प्राप्त विज्ञप्ति के अनुसार, सत्र के दौरान विभागों ने समिति को सभी प्रमुख योजनाओं के उद्देश्यों, लक्ष्य, शुभारंभ तिथि और अब तक की प्रगति से अवगत कराया। पिछले पांच वर्षों में जिलावार वित्तीय और भौतिक उपलब्धियों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया। इसके अतिरिक्त, विभिन्न प्रमुख कार्यक्रमों के तहत प्रस्तावित और आगामी परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति, चुनौतियाँ और कार्यान्वयन में तेजी लाने के उपाय की भी समीक्षा की गई।
सांसद ने सभी योजनाओं की स्थिति की व्यापक समीक्षा की और कार्यकुशलता में सुधार, निगरानी तंत्र को सुदृढ़ करने और जनता तक लाभों के प्रभावी वितरण को सुनिश्चित करने हेतु बहुमूल्य सुझाव दिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सुधारात्मक उपायों को समयबद्ध और प्रभावी तरीके से लागू किया जाए। बैठक के दौरान यह निर्णय भी लिया गया कि योजनाओं की प्रगति का नियमित आकलन सुनिश्चित करने के लिए ‘दिशा’ समिति की अनुवर्ती समीक्षा बैठकें समय-समय पर आयोजित की जाएंगी। सांसद ने यह भी स्पष्ट किया कि योजनाओं की सफलता में सहयोगात्मक दृष्टिकोण और पारदर्शिता अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इस बैठक के माध्यम से न केवल वर्तमान परियोजनाओं की स्थिति का विश्लेषण किया गया, बल्कि आगामी योजनाओं के लिए रणनीतियाँ विकसित करने और स्थानीय विकास की गति बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों और पंचायत प्रतिनिधियों ने भी अपने क्षेत्रों में विकासात्मक पहलों को प्रभावी बनाने के लिए सहयोग का आश्वासन दिया। अंततः यह बैठक दक्षिण अंडमान जिले में विकास योजनाओं के समय पर और प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जिससे जनता तक योजनाओं के लाभ जल्दी और पारदर्शी तरीके से पहुँच सकें।