मुंबई में जीत के बावजूद नये मेयर पर फैसला नहीं, राउत ने उठाया सवाल

शिवसेना (उबाठा) सांसद संजय राउत ने सोमवार को सत्तारूढ़ शिवसेना के निर्वाचित पार्षदों को होटल में स्थानांतरित किए जाने पर सवाल उठाया।
मुंबई में जीत के बावजूद नये मेयर पर फैसला नहीं, राउत ने उठाया सवाल
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मुंबईः शिवसेना (उबाठा) सांसद संजय राउत ने सोमवार को सत्तारूढ़ शिवसेना के निर्वाचित पार्षदों को होटल में स्थानांतरित किए जाने पर सवाल उठाया और कहा कि हाल ही में हुए नगर निकाय चुनावों के जनादेश को देखते हुए कोई भी पार्टी आसानी से बीएमसी में महापौर पद पर दावा नहीं कर सकती।

हाल ही में संपन्न हुए नगर निकाय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के गठबंधन ने 227 सदस्यीय बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) में स्पष्ट बहुमत हासिल किया, जिसमें भाजपा और शिवसेना ने क्रमशः 89 और 29 सीटें जीतीं। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (उबाठा) ने 65 सीटें जीतीं, जबकि उसकी सहयोगी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने छह सीटों पर जीत हासिल की।

शिंदे ने अपने पार्षदों को फाइव स्टार होटल में भेजा

शिवसेना ने अपने 29 सदस्यों को मुंबई के एक होटल में स्थानांतरित कर दिया है। पार्टी का कहना है कि यह कदम एक कार्यशाला के लिए उठाया गया है जिसका उद्देश्य उन्हें देश के सबसे धनी नगर निकाय बीएमसी के कामकाज से अवगत कराना है। यह कदम बीएमसी चुनाव परिणामों की घोषणा के बाद उठाया गया। चुनाव परिणामों से यह पता चलता है कि शिवसेना द्वारा जीती गई सीटें भाजपा के लिए महायुति का महापौर बनाने की रणनीति तैयार करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।

राउत ने पत्रकारों से कहा, ‘शिंदे पहले ही अपने पार्षदों को पांच सितारा होटल में भेज चुके हैं और मेरी जानकारी के अनुसार, भाजपा भी अपने पार्षदों को सुरक्षित स्थान पर ले जाने की योजना बना रही है। कौन किससे डर रहा है? आप सरकार में हैं। मुख्यमंत्री दावोस (स्विट्जरलैंड) में विश्व आर्थिक मंच की बैठक में भाग लेने के साथ ही पार्षदों के स्थानांतरण पर नजर रख रहे हैं। यह हास्यास्पद है।’

उद्धव ठाकरे ने विपक्ष में बैठने का किया फैसला

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उस टिप्पणी का जिक्र करते हुए कि भाजपा ने उस शहर में कांग्रेस को हराया जहां पार्टी का जन्म हुआ था, राउत ने कहा कि प्रधानमंत्री ने इतिहास को नजरअंदाज किया है। राउत ने कहा कि (तत्कालीन अविभाजित) शिवसेना ने पिछले 25 वर्षों से बीएमसी पर नियंत्रण बनाए रखा था जबकि कांग्रेस मुंबई की राजनीति में काफी हद तक हाशिए पर रही थी।

राज्यसभा सदस्य ने यह भी याद दिलाया कि कांग्रेस की स्थापना मुंबई में हुई थी और स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ भी इसी शहर से शुरू किया गया था। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत के राजनीतिक इतिहास के उन महत्वपूर्ण चरणों के दौरान भाजपा का अस्तित्व ही नहीं था। जब राउत से पूछा गया कि क्या शिवसेना (उबाठा) ने बीएमसी में विपक्ष में बैठने का फैसला किया है, तो उन्होंने कहा कि ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया गया है और पार्टी अभी राजनीतिक घटनाक्रमों पर नजर रख रही है।

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अगर कोई मराठी प्रधानमंत्री बने तो गर्व होगा

उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा, ‘हम इन घटनाक्रमों का आनंद ले रहे हैं।’ व्यंग्यात्मक टिप्पणी करते हुए राउत ने कहा कि बीएमसी और अन्य नगर निकाय चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का स्विट्जरलैंड में जिस तरीके से भव्य स्वागत किया गया, उससे ऐसा प्रतीत होता है मानो वह प्रधानमंत्री बनने की राह पर हों। हालांकि, शिवसेना (उबाठा) नेता ने यह भी कहा कि अगर भविष्य में कोई मराठी नेता इस पद पर आसीन होता है तो उन्हें गर्व होगा।

राउत ने फडणवीस द्वारा शिवसेना (उबाठा) प्रमुख उद्धव ठाकरे से बातचीत करने की अटकलों को भी खारिज कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पड़ोसी कल्याण-डोम्बिवली महानगरपालिका (ठाणे जिले में) में भाजपा पार्षदों के बीच फूट डालने की कोशिश कर रहे हैं और मुंबई में भी इसी तरह का कदम उठा सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शिंदे ने पहले भी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के समर्थन से शिवसेना को विभाजित कर दिया था।

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