वर्ष 1978 के बाद वन अतिक्रमणकर्ताओं के पुनर्वास प्रस्ताव में पारदर्शिता की मांग

वर्ष 1978 के बाद वन अतिक्रमणकर्ताओं के पुनर्वास प्रस्ताव में पारदर्शिता की मांग
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सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजयपुरम :  मध्य अंडमान के कटबर्ट बे तथा इसके आसपास के वन क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों के लम्बे समय से लंबित पुनर्वास मुद्दे को लेकर आज एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें सांसद बिष्णु पद रे ने प्रभावित क्षेत्रों के प्रतिनिधियों तथा स्थानीय निवासियों के साथ प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से विस्तृत चर्चा की। यह मुद्दा वर्षों से संवेदनशील रहा है, क्योंकि वर्ष 1978 के बाद अतिक्रमणकर्ता माने गए अनेक परिवार दशकों से अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता और असमंजस में जीवन गुजार रहे हैं।

बैठक के दौरान वन विभाग ने सांसद को यह महत्वपूर्ण जानकारी दी कि अंडमान एवं निकोबार प्रशासन ने सभी प्रभावित परिवारों के पुनर्वास हेतु तैयार किए गए एक प्रस्तावित ढांचे को विधिवत रिकॉर्ड पर रखते हुए माननीय सर्वोच्च न्यायालय में एक इंटरलोक्यूटरी एप्लिकेशन दाखिल कर दी है। यह आवेदन वर्तमान में सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है और अंतिम निर्णय आने तक प्रशासन द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सकता।

सांसद बिष्णु पद रे ने पुनर्वास प्रक्रिया में पारदर्शिता, जनभागीदारी और संवाद को अत्यंत आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि अंतिम निर्णय से पहले प्रभावित परिवारों को यह जानने का पूरा अधिकार है कि प्रशासन ने सर्वोच्च न्यायालय में क्या प्रस्ताव रखा है और उनके हितों की सुरक्षा किस प्रकार सुनिश्चित की जा रही है। इसी उद्देश्य से उन्होंने प्रशासन से अनुरोध किया कि इंटरलोक्यूटरी एप्लिकेशन की प्रति, साथ ही पुनर्वास प्रस्ताव का विस्तृत खाका, सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराया जाए ताकि इच्छुक एवं प्रभावित परिवार प्रस्ताव के वास्तविक स्वरूप से अवगत हो सकें।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि स्थानीय निवासियों या विशेषज्ञों की ओर से कोई सुझाव, आपत्ति या संशोधन के बिंदु सामने आते हैं, तो उन्हें समय रहते सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जा सके। ऐसा करने से न केवल प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी, बल्कि जमीन पर मौजूद वास्तविकताओं को भी न्यायिक निर्णय में सम्मिलित करने का अवसर मिलेगा।

सांसद ने दोहराया कि "कोई भी पात्र परिवार अनसुना नहीं रहना चाहिए" और पुनर्वास योजना न्यायोचित, मानवीय तथा व्यवहारिक होनी चाहिए। उन्होंने क्षेत्र के लोगों को आश्वासन दिया कि उनका कार्यालय इस मामले की निरंतर निगरानी कर रहा है और जनता तथा प्रशासन के बीच रचनात्मक संवाद को बढ़ावा देते हुए एक न्यायपूर्ण समाधान की दिशा में कार्य करता रहेगा।

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