

सन्मार्ग संवाददाता
श्री विजयपुरम : अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति, जीवनरक्षक दवाओं की गुणवत्ता पर उठ रहे सवाल तथा आपातकालीन दवाओं की लगातार कमी को लेकर हिंदू राष्ट्र शक्ति, अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह के राज्य युवा अध्यक्ष अंग्शुमन रॉय ने सांसद विष्णुपद रे को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर संसद में इस गंभीर मुद्दे को उठाने तथा केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप कराने की मांग की है। ज्ञापन में कहा गया है कि संगठन लंबे समय से स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी, आधारभूत संरचना और जनहित के विभिन्न मुद्दों को उठाता रहा है। इस बार संगठन ने द्वीपवासियों के जीवन और स्वास्थ्य से जुड़े गंभीर संकट की ओर सांसद का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा है कि यह केवल प्रशासनिक लापरवाही का मामला नहीं, बल्कि संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत नागरिकों को प्राप्त जीवन के मौलिक अधिकार से जुड़ा अत्यंत गंभीर विषय है। ज्ञापन के साथ सोशल मीडिया के माध्यम से प्राप्त चिकित्सकों का एक पत्र भी संलग्न किया गया है, जिसमें गंभीर रूप से बीमार मरीजों को दी जा रही नॉरएड्रेनालिन इन्फ्यूजन की गुणवत्ता और चिकित्सकीय प्रभावशीलता पर गंभीर संदेह व्यक्त किया गया है। चिकित्सकों ने इसकी गुणवत्ता की तत्काल वैधानिक जांच, गुणवत्ता परीक्षण तथा कोल्ड-चेन प्रणाली के सत्यापन की मांग की है। इसके अलावा हृदयाघात, मस्तिष्काघात, दौरे और शॉक जैसी आपातकालीन स्थितियों में उपयोग होने वाली आवश्यक जीवनरक्षक दवाओं की लगातार कमी पर भी चिंता व्यक्त की गई है। ज्ञापन में कहा गया है कि ये शिकायतें सीधे मरीजों का उपचार कर रहे चिकित्सकों की ओर से सामने आई हैं, इसलिए इनकी उच्चस्तरीय प्रशासनिक एवं संसदीय जांच आवश्यक है। संगठन ने कहा कि अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह की भौगोलिक परिस्थितियां देश के अन्य हिस्सों से अलग हैं। पूरे केंद्र शासित प्रदेश के लिए जी.बी. पंत अस्पताल ही एकमात्र प्रमुख रेफरल अस्पताल है। ऐसे में यदि यहां आवश्यक दवाएं उपलब्ध नहीं हों या उनकी गुणवत्ता पर संदेह उत्पन्न हो जाए तो मरीजों के पास तत्काल उपचार का कोई दूसरा विकल्प नहीं रहता। मुख्यभूमि के अस्पतालों तक मरीजों को एयर एम्बुलेंस या हवाई मार्ग से भेजना महंगा, समयसाध्य और कई बार चिकित्सकीय रूप से संभव भी नहीं होता। ऐसी स्थिति में दवा खरीद, गुणवत्ता नियंत्रण अथवा स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की प्रशासनिक चूक सीधे द्वीपवासियों के जीवन को खतरे में डाल सकती है। ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया है कि अब तक केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के किसी वरिष्ठ अधिकारी ने जी.बी. पंत अस्पताल का व्यापक या आकस्मिक निरीक्षण नहीं किया है। अस्पताल की आधारभूत सुविधाओं, वार्डों की स्वच्छता, मरीजों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता तथा समग्र स्वास्थ्य व्यवस्था की उच्चस्तरीय निगरानी का अभाव गंभीर चिंता का विषय बताया गया है। संगठन ने सर्वोच्च न्यायालय के पश्चिम बंग खेत मजदूर समिति बनाम पश्चिम बंगाल राज्य (1996) के ऐतिहासिक निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि समय पर आपातकालीन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना सरकार का संवैधानिक दायित्व है और इसमें विफलता अनुच्छेद-21 का उल्लंघन मानी गई है। साथ ही ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स अधिनियम, 1940 तथा ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स नियम, 1945 के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि दवाओं की गुणवत्ता, भंडारण और आपूर्ति में किसी भी प्रकार की लापरवाही कानून का उल्लंघन है।