

मुनमुन, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : बंगाल टीचर्स एंड एम्प्लॉइज एसोसिएशन (BTEA) ने राज्य सरकार से मांग की है कि कार्यरत शिक्षकों को अनिवार्य शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी TET से छूट दिलाने के लिए पश्चिम बंगाल विधानसभा में एकमत से प्रस्ताव पास किया जाए। सुप्रीम कोर्ट के पिछले फैसले के अनुसार देश के सभी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक शिक्षकों को 2028 तक TET पास करना अनिवार्य कर दिया गया है, जिसमें केवल उन वरिष्ठ शिक्षकों को राहत दी गई है जिनके रिटायरमेंट में 5 वर्ष या उससे कम समय बचा है। इस स्थिति से चिंतित शिक्षक संगठन ने स्कूल शिक्षा मंत्री दीपक बर्मन को पत्र लिखकर हस्तक्षेप करने और जम्मू-कश्मीर, तेलंगाना तथा तमिलनाडु के तर्ज पर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर प्रस्ताव पारित करने का आग्रह किया है ताकि केंद्र सरकार से इस मामले में आपातकालीन अध्यादेश लाने का अनुरोध किया जा सके।
पुराने शिक्षकों की नौकरी बचाने के लिए विशेष गुहार
संगठन का तर्क है कि राइट टू एजुकेशन एक्ट 2009 के तहत और वर्ष 2011 में पश्चिम बंगाल में TET नियम लागू होने से पहले जो शिक्षक नियुक्त होकर सेवा दे रहे थे, उन्हें इस अनिवार्य परीक्षा के दायरे से बाहर रखा जाना चाहिए। वर्तमान में देश भर में लगभग 20 लाख और अकेले पश्चिम बंगाल में 90 हजार से अधिक ऐसे शिक्षक हैं जिन्होंने TET पास नहीं किया है, जबकि RTE और NCTE की गाइडलाइंस के मुताबिक यह योग्यता अनिवार्य कर दी गई है। संगठन ने मांग की है कि NCTE की अधिसूचना से पहले नियुक्त हुए इन शिक्षकों की नौकरी की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और उन्हें इस कानूनी उलझन से बचाने के लिए सरकार ठोस कदम उठाए।