पहाड़ों पर पेड़ों की अंधाधुंध कटाई ने खफा प्रकृति अब बदला ले रही : सुप्रीम कोर्ट

कोर्ट ने केंद्र, एनडीएमए और प्रभावित राज्यों से किया जवाब तलब, राज्यों का हाल बद से बदतर
rampant_deforestion
पहाड़ों में पेड़ों की अंधाधुंध कटाई
Published on

नयी दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और पंजाब जैसे राज्यों में अभूतपूर्व भूस्खलन और बाढ़ का संज्ञान लेते हुए गुरुवार को केंद्र, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) तथा अन्य से जवाब तलब करते हुए कहा कि पेड़ों की अवैध कटाई के कारण ये आपदाएं आयी हैं। इन राज्यों में बारिश से हो रही तबाही पर चिंता जता जताते हुए न्यायालय ने कहा कि यह सिर्फ प्राकृतिक आपदा नहीं बल्कि इंसानों का पैदा किया गया संकट है। पहाड़ों पर अवैध पेड़ कटाई ने प्रकृति को क्रोधित कर दिया है, अब वह बदला ले रही है।

04091-pti09_04_2025_000385b.
कपूरथला-

सुनवाई दो हफ्ते बाद

प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) बीआर गवई और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन के पीठ ने अनामिका राणा की याचिका पर सुनवाई करते हुए ‘विकास और पर्यावरण’ के बीच संतुलन बनाये रखने पर जोर देते हुए केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के साथ ही हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू और कश्मीर और पंजाब की सरकारों को भी नोटिस जारी कीं। पीठ ने कहा कि हमने उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और पंजाब में अभूतपूर्व भूस्खलन और बाढ़ देखी है। मीडिया में आयी खबरों से पता चला है कि बाढ़ में भारी मात्रा में लकड़ी बहकर आयी। प्रथमदृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि पेड़ों की अवैध कटाई हुई है। पीठ ने याची की ओर से पेश हुए अधिवक्ता आकाश वशिष्ठ और शुभम उपाध्याय को कहा कि प्रतिवादियों को नोटिस जारी करें। याचिका में कहा गया है कि हिमाचल में बाढ़ के दौरान बड़ी संख्या में लकड़ियां बहकर आयीं, जिससे साफ है कि बड़े पैमाने पर पेड़ों की अवैध कटाई हुई है। अगली सुनवाई दो हफ्ते बाद होगी।

04091-pti09_04_2025_00
अमृतसरShiva Sharma

हिमाचल में अब तक हो चुकीं 343 मौतें, 43 लापता

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में गुरुवार को भूस्खलन के बाद दो मकान ढह गये, जिससे एक व्यक्ति की मौत हो गयी और छह अन्य मलबे में दब गये। इससे पहले मंगलवार रात अखाड़ा बाजार में दो मकान ढहने से एनडीआरएफ के एक जवान सहित दो लोगों की मौत हो गयी थी और दबे लोगों को निकालने के लिए बचाव अभियान पहले से ही जारी था। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (एसईओसी) के अनुसार, राज्य में कुल 1292 सड़क बंद हैं। इनमें से 294 सड़क मंडी में, 226 कुल्लू में, 216 शिमला में, 204 चंबा में और 91 सिरमौर जिले में अवरुद्ध हैं। राज्य में 20 जून को मानसून के आगमन के बाद से राज्य में 95 बार अचानक बाढ़, 45 बार बादल फटने और भूस्खलन की 127 बड़ी घटनाएं हुई हैं। मानसून शुरू होने के बाद से वर्षाजनित घटनाओं और सड़क दुर्घटनाओं में कम से कम 343 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 43 लोग लापता हैं।

04091-pti09_04_2025_000337b
जम्मू

पंजाब में अब तक 37 मौतें, 1.75 लाख हेक्टेयर जमीन की फसल बर्बाद

पंजाब के फिरोजपुर के हबीब गांव में 2,000 से अधिक स्वयंसेवी रेत के बोरों, रस्सियों और यहां तक कि हाथों से ही सतलुज नदी के पानी के लगातार बढ़ते दबाव से बांध को टूटने से बचाने के लिए दिन-रात जूझ रहे हैं। चार दिन बीत गए हैं और यह जद्दोजहद थमी नहीं है। पंजाब, हरियाणा और राजस्थान से आये ग्रामीण सेना के इंजीनियरों और जल निकासी अधिकारियों के साथ मिलकर बांध को टूटने से बचाने में लगे हुए हैं। संकट उस समय और गहरा गया जब हरिके हेडवर्क्स बैराज से 3.30 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। भारी बारिश, बादल फटने और भाखड़ा व पोंग बांध से पानी छोड़े जाने के बाद उफनती सतलज ने जीरा के माखू उप मंडल के मनु माछी गांव के पास आरजी तटबंध तोड़ दिया, जिससे चक मनु माछी, जमालीवाला, गट्टा डाल्लर और तीबी गांव जलमग्न हो गये हालांकि समय रहते लोगों को निकालने से जानें बच गयीं, लेकिन सैकड़ों एकड़ जमीन में लहलहाती फसलें बह गयीं। पंजाब 1988 के बाद की सबसे भीषण बाढ़ से जूझ रहा है। बुधवार तक मरने वालों की संख्या 37 हो गयी। राज्य के सभी 23 जिलों में 1.75 लाख हेक्टेयर जमीन की फसल बर्बाद हो चुकी है।

1-1-04091-pti09_04_2025_000356b
बाढ़ में डूबा पंजाब के पटियाला जिले का घनौरा गांव-

उत्तराखंड में अनेक सड़कें अवरूद्ध

उत्तराखंड के नैनीताल जिले में बारिश के कारण उफान पर आये एक बरसाती नाले में डूबने से एक वन दरोगा की मृत्यु हो गयी। प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्गो सहित अनेक सड़कें भूस्खलन से अवरूद्ध हैं। उत्तरकाशी जिले में यमुनोत्तरी राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्यानाचटटी में यमुना नदी पर बनी झील से जलनिकासी बढ़ाने के लिए मलबा हटाने के काम में गढ़गाड़ बरसाती नाले से लगातार मलबा आने तथा वर्षा होने से बाधा आ रही है। स्यानाचटटी झील में दो-तीन मीटर तक आरबीएम इकटठा होने से पानी का स्तर ऊपर आ गया है। जानकीचटटी क्षेत्र में बुधवार रात्रि लगातार भारी बारिश होने के कारण स्यानाचटटी पुल पर यमुना नदी का पानी बहने लगा जिसके बाद सुरक्षा की दृष्टि से उसे यातायात के लिए बंद कर दिया गया। राज्य में भूस्खलन के कारण राष्ट्रीय राजमार्गो और राज्य राजमार्गों सहित करीब 54 सड़कें यातायात के लिए अवरूद्ध हैं।

1-1-04091-pti09_04_2025_000341b
हरियाणा के गुरुग्राम में जलमग्न सब-वे में गोता लगाते बच्चे-

दिल्ली और हरियाणा में कई इलाके भी बाढ़ में डूबे

इस बीच देश के सभी नदियों में उफान के बीच गुरुवार को राजधानी दिल्ली में यमुना का पानी शहर के अंदर घुस गया है। पुराने रेलवे पुल पर यमुना नदी का जलस्तर पूर्वाह्न 11 बजे और दोपहर 12 बजे के बीच 207.47 मीटर पर स्थिर रहा हालांकि बाढ़ का पानी दिल्ली सचिवालय के पास पहुंच गया, जहां मुख्यमंत्री, कैबिनेट मंत्रियों और प्रमुख नौकरशाहों के कार्यालय हैं। हरियाणा के कई इलाके भी बाढ़ में डूबे हैं। राज्य में 11 लोगों की मौत हुई है।

logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in