डीम्ड विश्वविद्यालय विरोध: शिक्षा निदेशक ने छात्रों से किया संवाद

डीम्ड विश्वविद्यालय विरोध: शिक्षा निदेशक ने छात्रों से किया संवाद
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सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजयपुरम : प्रस्तावित डीम्ड विश्वविद्यालय के विरोध में जारी छात्र आंदोलन के बीच शिक्षा निदेशक विक्रम सिंह ने टीजीसीई ऑडिटोरियम में छात्रों की बड़ी सभा को संबोधित किया। सभा का उद्देश्य छात्रों की शंकाओं का समाधान करना था, लेकिन बैठक बिना किसी सहमति के समाप्त हो गई। संवाद के दौरान छात्रों और प्रशासन के बीच तीखी बहस देखने को मिली।

निदेशक ने सभा में स्पष्ट किया कि प्रस्तावित डीम्ड विश्वविद्यालय निजी नहीं है, बल्कि यह केंद्र सरकार द्वारा वित्तपोषित एक सरकारी विश्वविद्यालय होगा। उन्होंने बताया कि सातों घटक महाविद्यालय अपने वर्तमान भवनों में ही संचालित रहेंगे और आधारभूत संरचना को मजबूत किया जाएगा। इसके अलावा, यूपीएससी के माध्यम से स्थायी शिक्षकों की भर्ती जारी है और आने वाले वर्षों में और नियुक्तियां की जाएंगी। उन्होंने यह भी बताया कि मंगलुटान क्षेत्र में निर्माणाधीन प्रशासनिक भवन में कुलपति, रजिस्ट्रार, वित्त एवं विधि अनुभाग के कार्यालय स्थापित किए जाएंगे। इसके साथ ही उद्योग उन्मुख पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जाएंगे, जिससे छात्रों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। शुल्क वृद्धि की आशंकाओं को खारिज करते हुए निदेशक ने स्पष्ट किया कि शुल्क संरचना यथावत रहेगी और आरक्षण नीति, परीक्षा प्रणाली तथा डिग्री मान्यता सरकारी मानकों के अनुसार जारी रहेगी।

पांडिचेरी विश्वविद्यालय द्वारा जारी अनापत्ति प्रमाण पत्र और संक्रमण काल में परीक्षा सहयोग को भी निदेशक ने छात्रों के समक्ष रखा। इसके बावजूद कई छात्र डिग्री मान्यता, रैंकिंग और पूर्व परामर्श की कमी को लेकर संतुष्ट नहीं हुए। सभा के दौरान छात्रों ने भावनात्मक और शैक्षणिक चिंताओं को प्रमुखता से उठाया, जबकि प्रशासन ने कानूनी ढांचे और दीर्घकालिक लाभों की व्याख्या की।

अंततः विस्तृत प्रस्तुति और प्रशासन की स्पष्टीकरण के बावजूद बैठक के समापन तक छात्रों की सभी शंकाओं और चिंता का पूर्ण समाधान नहीं हो सका। छात्र अभी भी प्रस्तावित डीम्ड विश्वविद्यालय को लेकर संशय में हैं और आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दे रहे हैं।

इस सभा ने यह स्पष्ट कर दिया कि छात्रों की भावनाओं और शैक्षणिक हितों को ध्यान में रखते हुए प्रशासन और विश्वविद्यालय दोनों को समन्वयपूर्ण और पारदर्शी संवाद की आवश्यकता है। वहीं, छात्र अपनी मांगों में दृढ़ बने हुए हैं और भविष्य में भी उन्हें निरंतरता के साथ उठाने की संभावना है।

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