

केडी पार्थ, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : तीन ‘मृत वोटरों’ को मंच पर पेश किए जाने की घटना से जुड़े विवाद पर चुनाव आयोग को रिपोर्ट सौंप दी गई है। यह विवाद तृणमूल कांग्रेस के सर्वभारतीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की सभा के बाद सामने आया था।
दो वोटरों के मामले में अनिच्छाकृत गलती
आयोग सूत्रों के अनुसार, तीन में से दो वोटरों—मनिरुल मोल्ला और हरे कृष्ण गिरी—के मामलों में संबंधित बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) ने अनजाने में हुई गलती को स्वीकार किया है।
फॉर्म-6 के जरिए सुधार प्रक्रिया पूरी
रिपोर्ट में बताया गया है कि मनिरुल मोल्ला और हरे कृष्ण गिरी के नाम पहले बूथ पर तैयार की गई सूची में नहीं थे, लेकिन बाद में चुनाव आयोग की वेबसाइट पर उनके नाम दिखाई दिए। इसके बाद बीएलओ ने दोनों के घर जाकर फॉर्म-6 भरवाया और नए सिरे से मतदाता सूची में नाम जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की।
सभा से पहले ही प्रशासनिक कार्रवाई
चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने स्पष्ट किया कि अभिषेक बनर्जी की सभा होने से काफी पहले ही इन दोनों वोटरों के फॉर्म-6 से जुड़े सभी औपचारिक कार्य पूरे कर लिए गए थे यानी मंच से मुद्दा उठने से पहले ही प्रशासनिक स्तर पर सुधार की प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी।
तीसरे मामले में स्पष्ट त्रुटि स्वीकार
तीसरी वोटर माया दास के मामले में रिपोर्ट में साफ तौर पर ‘गलती’ मानी गई है। आयोग ने माना है कि यह एक प्रशासनिक त्रुटि थी। चुनाव आयोग ने इस तरह की गलतियों से बचने के लिए संबंधित अधिकारियों को भविष्य में और अधिक सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।
प्रशासनिक चूक, न कि जानबूझकर की गई गलती
उल्लेखनीय है कि मनिरुल मोल्ला और हरे कृष्ण गिरी मटियाब्रुज के निवासी हैं, जबकि माया दास काकद्वीप की रहने वाली हैं। ‘मृत वोटर’ विवाद पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं, लेकिन आयोग की रिपोर्ट में इसे मुख्य रूप से प्रशासनिक त्रुटि और अनिच्छाकृत गलती के रूप में ही बताया गया है।