

अधिसूचना अचानक जारी, छात्रों और अभिभावकों में शंका और भ्रम बढ़ा
सन्मार्ग संवाददाता
श्री विजयपुरम : जेएनआरएम एलुमनाई एसोसिएशन के चेयरमैन और द्वीपों के वरिष्ठ राजनीतिक व्यक्तित्व डी. अय्यप्पन ने पांडिचेरी यूनिवर्सिटी से कॉलेजों की संबद्धता समाप्त कर नवगठित डीम्ड यूनिवर्सिटी से जोड़ने के फैसले के खिलाफ जारी छात्र आंदोलन को खुला समर्थन दिया है। प्रदर्शन स्थल पर मीडिया से बातचीत करते हुए अय्यप्पन ने स्पष्ट किया कि वह यहां राजनीतिक हैसियत से नहीं बल्कि एक पूर्व छात्र के रूप में आए हैं, जिन्हें द्वीपों में उच्च शिक्षा के भविष्य की चिंता है। उन्होंने बताया कि लॉ कॉलेज, जेएनआरएम और एएनकॉलेज सहित विभिन्न संस्थानों के छात्र पिछले कई दिनों से इस प्रशासनिक निर्णय का विरोध कर रहे हैं, जिसे वे अचानक और बिना पर्याप्त विचार के लिया गया फैसला मानते हैं। अय्यप्पन के अनुसार अंडमान एवं निकोबार के कॉलेज वर्ष 1988 से पांडिचेरी यूनिवर्सिटी से सफलतापूर्वक संबद्ध रहे हैं और उससे पहले पंजाब यूनिवर्सिटी से जुड़े थे। उन्होंने कहा कि पांडिचेरी यूनिवर्सिटी से जुड़ाव का निर्णय ऐतिहासिक रूप से सोच-समझकर लिया गया था और इसने दशकों तक छात्रों को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त डिग्री और शैक्षणिक विश्वसनीयता प्रदान की। उन्होंने डीम्ड यूनिवर्सिटी की स्थापना की तात्कालिकता और 2024 में अचानक जारी उस अधिसूचना पर सवाल उठाया, जिसके तहत सभी द्वीप कॉलेजों को उसके अधीन लाया गया। उन्होंने माना कि स्थानीय प्रशासन ने निर्देशों के तहत कार्य किया होगा, लेकिन अधिसूचना भारत सरकार द्वारा जारी की गई थी, इसलिए इसकी समीक्षा या बदलाव की जिम्मेदारी भी केंद्र सरकार की ही है। अय्यप्पन ने डीम्ड यूनिवर्सिटी की तैयारी पर चिंता जताते हुए आरोप लगाया कि वर्तमान में वहां पर्याप्त फैकल्टी, शैक्षणिक ढांचा और परीक्षा तंत्र का अभाव है।
उन्होंने चेतावनी दी कि इस बदलाव से फीस में बढ़ोतरी, डिग्रियों की मान्यता में कमी और परीक्षा व प्रमाणन संबंधी प्रशासनिक भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि फिलहाल यह विश्वविद्यालय सीमित स्टाफ के साथ एक कमरे से संचालित होता प्रतीत हो रहा है, जो छात्रों और अभिभावकों में भरोसा नहीं जगाता। छात्र संगठनों से एकजुट होने की अपील करते हुए अय्यप्पन ने एसएफआई, एबीवीपी और एनएसयूआई जैसे प्रमुख संगठनों को शांतिपूर्ण, संगठित और बड़े स्तर पर आंदोलन चलाने का आग्रह किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह मुद्दा केवल संबद्धता का नहीं बल्कि द्वीपों के छात्रों के दीर्घकालिक शैक्षणिक और पेशेवर भविष्य से जुड़ा हुआ है।