AI से मिनटों में साइबर अटैक, सरकारें टॉप टारगेट!

माइक्रोसॉफ्ट की ‘डिजिटल डिफेंस रिपोर्ट-2026’, भारत टॉप-7 प्रभावित देशों में, डिफेंस सेक्टर में रैनसमवेयर पांच गुना बढ़ा
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बढ़ रहे साइबर हमले (AI जनेरेटेड छवि)
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नयी दिल्ली : कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI ने काम की गति बढ़ाने के साथ साइबर अटैक की रफ्तार भी कई गुना बढ़ा दी है। पहले किसी सिस्टम पर हमला करने में हमलावरों को कई दिन लगते थे लेकिन अब AI की मदद से सिस्टम की कमजोरियां खोजने और जानकारी चुराने का काम बहुत तेजी से हो रहा है। भारत के दुनिया के टॉप-7 साइबर प्रभावित देशों में शामिल होने के मद्देनजर इस बात को लेकर भारत की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है।

रैनसमवेयर अटैक पांच गुना बढ़े

माइक्रोसॉफ्ट की डिजिटल डिफेंस रिपोर्ट 2026 के अनुसार दुनिया भर में ट्रैक किये गये साइबर खतरों में भारत की हिस्सेदारी 2.5 फीसदी रही। गत एक साल में रैनसमवेयर अटैक पांच गुना बढ़े हैं। ऑनलाइन शॉपिंग और वेब ब्राउजिंग के दौरान फेक कैप्चा दिखाकर यूजर के सिस्टम को हैक किया जा रहा है। वहीं माइक्रोसॉफ्ट टीम्स जैसी सेवाओं पर फोन करके या खुद को IT सपोर्ट बताकर कंपनियों को निशाना बनाया जा रहा है। एक साल में टीम्स पर वॉइस फिशिंग 502 फीसदी बढ़ी जबकि फेक कैप्चा वाले हमले करीब 8 गुना बढ़ गये।

साइबर हमले के 3 आम तरीके

साइबर हमलावारों को अपने शिकार को फांसने के लिए अभी सबसे आम तरीका QR कोड है। ईमेल या PDF में QR कोड भेजा जाता है। यूजर इसे स्कैन करते ही साइबर हमले का शिकार हो सकता है। एक साल में माइक्रोसॉफ्ट ने 14.5 करोड़ QR फिशिंग हमले पकड़े। दूसरा तरीका फेक कैप्चा है। वेबसाइट पर ‘मैं रोबोट नहीं हूं’ या फर्जी एरर/अपडेट का मैसेज दिखाकर यूजर से एक कमांड कॉपी-पेस्ट करवाई जाती है। करीब 11 लाख डिवाइस पर ऐसी गतिविधि मिली। और तीसरा तरीका बॉस या HR बनकर हमला करना है। इसमें हमलावर अब केवल बैंक या कंपनी की कॉपी नहीं करते। बल्कि कर्मचारी के बॉस, HR, पेरोल टीम, वेंडर या बिजनेस पार्टनर की पहचान बनाकर हमला करते हैं। अप्रैल-जून 2026 में रिपोर्ट किये गये 85 फीसदी फिशिंग ईमेल में किसी की पहचान की कॉपी की गयी थी।

साइबर अटैक इस तरह भी

कई AI एजेंट ने मिलकर एक कंपनी के नेटवर्क पर 32 स्टेप वाला साइबर हमले का प्लान बनाया और उसे खुद पूरा किया। सर्वर और यूजर अकाउंट को कंट्रोल में लिया गया। यह हमला लैब टेस्ट में हुआ। इसके अलावा जुलाई 2026 में ‘जेडपफर’ नाम से पहला ऑटोमेटेड रैनसमवेयर सामने आया। यानी AI सिर्फ हमले में मदद नहीं कर रहा बल्कि रैनसमवेयर की पूरी प्रक्रिया को खुद चलाने की दिशा में बढ़ रहा है। यही नहीं सॉफ्टवेयर में कमजोरी मिलने के बाद उस पर साइबर अटैक का औसत समय 24 घंटे से भी कम हो गया है। पहले कंपनियों को ऐसी कमजोरी ठीक करने के लिए ज्यादा समय मिल जाता था।

डिजिटल वर्कफोर्स: 2 साल में 130 करोड़ होंगे AI एजेंट

कंपनियों में AI एजेंट का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। करीब 88 फीसदी कंपनियां AI एजेंट आजमा रही हैं, जबकि 82 फीसदी लीडर अगले 12 से 18 महीने में इनका इस्तेमाल बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार दो साल में AI एजेंट की संख्या 130 करोड़ तक पहुंच सकती है। AI एजेंट ईमेल, कैलेंडर, सिस्टम अपडेट और डेटा एक्सेस जैसे काम कर सकते हैं। इनकी संख्या बढ़ने के साथ साइबर खतरा भी बढ़ रहा है। किसी AI एजेंट पर हमला होने पर उससे जुड़े सिस्टम और डेटा तक भी पहुंच बनायी जा सकती है।

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