कल्याणकारी योजनाओं में कटौती, यह बजट किसके लिए है : अमित मित्रा

अमित मित्रा
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सबिता, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : राज्य के पूर्व वित्त मंत्री तथा वर्तमान में सीएम ममता बनर्जी के मुख्य सलाहकार अमित मित्रा ने केंद्रीय बजट को गरीब-विरोधी, किसान-विरोधी और मध्यम वर्ग-विरोधी बताया। उन्हाेंने 2015-16 की तुलना में सामाजिक क्षेत्र के आवंटन में हुई भारी कटौती पर कटाक्ष किया। रविवार को मीडिया को संबोधित करते हुए अमित मित्रा ने ’डानकुनी से सूरत तक नये माल ढुलाई गलियारे की बजट में घोषणा पर परियोजना को लागू करने के सरकार के वादों पर संदेह व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा माल ढुलाई गलियारे दस वर्षों से अधूरे पड़े हैं और यह परियोजना बिहार से लगी सीमा पर अभी अटकी हुई है।

शिक्षा क्षेत्र में बजट में उन्होंने क्या किया है?

उन्होंने आरोप लगाया जब दुनिया शिक्षा पर खर्च बढ़ा रही है, भारत इसमें कटौती कर रहा है। शिक्षा पर खर्च 5-6 प्रतिशत के करीब होना चाहिए, लेकिन यह बजट इसके विपरीत दिशा में जा रहा है। यह 2015-16 के 3.8 प्रतिशत से घटकर मौजूदा बजट अनुमानों में 2.60 % रह गया है। विश्व के लगभग सभी देश शिक्षा के लिए अपने आवंटन में वृद्धि कर रहे हैं। अधिकांश लक्ष्यों के अनुसार शिक्षा पर व्यय लगभग 5-6% होना चाहिए।

किसान विरोधी कदम...

उर्वरक सब्सिडी के मुद्दे पर उन्होंने आरोप लगाया कि 2015-16 में कुल व्यय के 4.04 प्रतिशत से आवंटन घटकर मौजूदा बजट अनुमानों में 3.19 प्रतिशत हो गया है। उन्होंने कहा कि ‘यह एक गंभीर कटौती है और किसान विरोधी कदम है।’ उन्होंने समाज के कमजोर वर्गों अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और अल्पसंख्यकों के लिए आवंटन में कमी का भी मुद्दा उठाया और कहा कि व्यय 2015-16 में कुल बजट के 0.21 प्रतिशत से घटकर 0.19 प्रतिशत हो गया है और अनुमान है कि इसमें और भी गिरावट आएगी। ‘यह कमजोर वर्गों की उपेक्षा को दर्शाता है।’ उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के लिए वित्त वर्ष 2024-25 के बजट अनुमान को लगभग 30,170 करोड़ रुपये से संशोधित करके 13,670 करोड़ रुपये कर दिया गया, जबकि वास्तविक व्यय केवल 5,815 करोड़ रुपये रहा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) और स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) में भी इसी तरह के रुझान देखने को मिले। ये उदाहरण दर्शाते हैं कि बजट अनुमान विश्वसनीय नहीं होते। वास्तविक आंकड़े आने तक आवंटन धराशायी हो जाते हैं।

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